रिटेल निवेशक कब तक टेक्निकल एनालिस्टों के चार्टों की धुन पर, सपेरों की बीन पर सांप की तरह नाचते रहेंगे? यह एक बड़ा सवाल है और इसका जवाब रिटेल निवेशक ही दे सकते हैं। अभी तक वे ब्रांड-भक्त बने हुए हैं और अपने ही ब्रोकरों का कहा सुनते हैं। लेकिन इन ब्रोकरों का सरोकार तो अपने धंधे-पानी से ज्यादा और रिटेल निवेशकों की जेब से कम होता है। जैसी कि उम्मीद थी, चार्टवाले राग अलापने लगे किऔरऔर भी

सामाजिक सरोकार से दूर-दूर तक नाता न रखनेवाला रिलायंस समूह अगर ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकसित करने से भाग खड़ा हो तो कोई बात नहीं, लेकिन टाटा जैसा समूह रुचि न दिखाए तो आश्चर्य होता है। लेकिन हुआ यही। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के गांवों में शहरों जैसी सुविधाएं मुहैया कराने के सपने को हकीकत में बदलने की कवायद में ग्रामीण विकास मंत्रालय जुट गया है। 248 करोड़ रुपए का पायलट प्रोजेक्ट जनवरी 2011 में चालू होऔरऔर भी

बाजार में निवेश का निर्णय कई पहलुओं से जुड़ा हुआ है। जैसे, अगर हम इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट (बीएसई कोड – 532832, एनएसई कोड – IBREALEST) का मामला लें तो इसका प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) और पी/ई अनुपात इसमें कतई निवेश की इजाजत नहीं देता। इसका ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस 1.12 रुपए है। शेयर कल बीएसई में 2.07 फीसदी बढ़कर 209.65 रुपए पर बंद हुआ है। इस तरह उसका पी/ई अनुपात निकलता है 187.36। इतनेऔरऔर भी