विदेशी मुद्रा के असली सौदागर हैं हमारे बैंक और इनके प्रमुख ग्राहक हैं हमारे आयातक-निर्यातक। आयातकों व निर्यातकों को चिंता रहती है कि उनका विदेशी मुद्रा खर्च या आमदनी कहीं विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय मुद्रा में घट-बढ़ न जाए। इसलिए वे बैंकों के पास ऐसे डेरिवेटिव सौदों के लिए जाते हैं ताकि इससे बचा जा सके। ऐसे ज्यादातर सौदे ओटीसी (ओवर द काउंटर) बाजार यानी दो पार्टियों ग्राहक व विक्रेता के बीच आपस मेंऔरऔर भी

रिलायंस समूह अब भी शेयर बाजार का बेताज बादशाह बना हुआ है। इसलिए मुकेश और अनिल अंबानी के बीच सुलझ हो जाने के बाद पूरी उम्मीद है कि सोमवार को बाजार में तेजी का आलम रहेगा। इस बीच आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज जैसी देश की प्रमुख ब्रोकरेज व निवेश बैंकिंग कंपनी ने भी अनुमान जताया है कि इस साल बीएसई सेंसेक्स 19,000 अंक के ऊपर जा सकता है। कंपनी की सीईओ व प्रबंध निदेशक माधबी पुरी बुच का कहनाऔरऔर भी

जो चला गया, उसका गम क्या? वह चाहे हादसा था या प्रकृति का चक्र, हम उसे रोकने की बात तो दूर, छू तक नहीं सकते। इसलिए जिसका जितना साथ है, हंस बोल कर ही बिताना चाहिए ताकि कोई मलाल न रहे।और भीऔर भी