देश में औद्योगिक उत्पादन की दर लगातार छह महीनों से दहाई अंकों में बनी हुई है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2010 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 13.5 फीसदी बढ़त दर्ज की गई है। पूरे वित्त वर्ष 2009-10 की बात करें तो आईआईपी की वृद्धि दर 10.4 फीसदी रही है। पिछले वित्त वर्ष 2008-09 में वैश्विक मंदी के कारण यह दर केवल 2.8 फीसदी रह गई थी। हालांकि मार्च की औद्योगिक वृद्धिऔरऔर भी

अभी अमेरिका में गोल्डमैन सैक्स पर खुद वहां की पूंजी बाजार नियामक संस्था एसईसी (सिक्यूरीज एंड एक्सचेंज कमीशन) द्वारा फ्रॉड का आरोप लगाने जाने के बाद महीने भर भी नहीं बीते हैं कि दूसरे अहम वित्तीय संस्थान मॉरगन स्टैनले पर निवेशकों को डेरिवेटिव सौदों में गुमराह करने का आरोप लग गया है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल ने कारोबारियों के हवाले खबर दी है कि अमेरिकी की संघीय जांच एजेंसियां इन सौदों की तहकीकात में लगऔरऔर भी

सुबह हमने चलते-चलते बताया था कि विमल ऑयल एंड फूड्स में तेजी के आसार हैं और वाकई यह शेयर बीएसई में एक ही दिन में 11.63 फीसदी की बढ़त के साथ 44.65 रुपए पर पहुंच गया। ऊपर में यह 45 तक गया था और फिर इसमें थोड़ी कमी आई है। हालांकि बढ़त 10 फीसदी के ऊपर बरकरार है। अनुमान है कि यह शेयर जल्दी ही 48 रुपए तक जा सकता है। वैसे, मेहसाणा (गुजरात) की यह कंपनीऔरऔर भी

मैं लगातार इस बात पर कायम हूं कि भारत सचमुच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए जबरदस्त आकर्षण का स्रोत बना हुआ है। यूरोप के ऋण संकट ने विदेशी पूंजी के प्रवाह को भारत की तरफ मोड़ा है। यह बात पिछले कुछ दिनों में वित्त मंत्रालय के आला अधिकारी भी स्वीकार कर चुके हैं। जिस तरह कल भारतीय रिजर्व बैंक ने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की शर्तों में ढील दी और गवर्नर डी सुब्बारावऔरऔर भी

जिंदगी जिनके लिए सिर्फ जीते चले जाने का नाम है, उनको कहां कभी इससे किसी तरह का गिला-शिकवा होनेवाला है। इसीलिए एकाध अपवादों को छोड़ दें तो जानवर कभी आत्महत्या नहीं करते।और भीऔर भी

गिलैंडर्स आर्बुथनॉट का नाम ही बड़ा अटपटा है। यह है तो कोलकाता के जी डी कोठारी समूह की कंपनी। लेकिन इसकी स्थापना एफ एम गिलैंडर्स और जी सी आर्बुथनॉट ने साल 1819 में एक पार्टनरशिप फर्म के रूप में की थी। यह 1935 में प्राइवेट लिमिटेड और 1947 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी। आजादी के बाद इसका स्वामित्व जी डी कोठारी समूह के पास आ गया। कंपनी चाय के बगानों से लेकर कंसट्रक्शन व रीयल एस्टेट, टेक्सटाइलऔरऔर भी