केंद्र सरकार नए वित्त वर्ष में बाजार से लिए जानेवाले उधार का बड़ा हिस्सा सितंबर 2010 तक जुटा लेगी। रिजर्व बैंक द्वारा घोषित कैलेंडर के मुताबिक पहली छमाही में 2.87 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बांड जारी किए जाएंगे। बता दें कि इन बांडों में वैसे तो आम निवेशक भी पैसा लगा सकते हैं। लेकिन अभी तक तकरीबन सारा निवेश बैंक, बीमा कंपनियां या म्यूचुअल फंड व कॉरपोरेट इकाइयां ही करती रही है। रिजर्व बैंक की तरफऔरऔर भी

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के एक नए सर्कुलर ने ऐसी तमाम कंपनियों को सकते में डाल दिया है जो करेंसी फ्यूचर्स सौदों में हुए मार्क टू मार्क नुकसान के दम पर कर में छूट हासिल करती रही है। सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव या करेंसी फ्यूचर्स सौदे असल में पूरे नहीं हो जाते, तब उन पर होनेवाले सांकेतिक नुकसान का फायदा कर रियायत के लिए नहीं मिल सकता। असल मेंऔरऔर भी