कॉरपोरेट धन आ रहा सीधे रिटेल ट्रेडिंग में?

साफ है कि ये रिटेल श्रेणी के ट्रेडर और निवेशक ही हो सकते हैं जो फटाफट कमाने की लालच में खरीद रहे हैं जिससे बाज़ार कम वोल्यूम में भी चढ़ा जा रहा है। उसी तरह जैसे छिछले पानी में जमकर छपाक-छपाक होता है। सवाल उठता है कि जब कोरोना काल के डेढ़ साल में करोड़ों लोगों का रोज़ी-रोज़गार चौपट हो गया, तब कौन-से ‘रिटेल’ लोग हैं जिनके पास इतना इफरात धन आ गया है? गौतम अडानी की संपत्ति कोरोना से घिरे साल में 4400 करोड़ डॉलर बढ़कर 7670 करोड़ डॉलर हो गई। मुकेश अंबानी लॉकडाउन के बाद हर घंटे ₹90 करोड़ कमाते रहे। ऊपर से नेताओं का कालाधन। अब बुधवार की बुद्धि…

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