करीब साल-सवा साल पहले हमारे चक्री महाराज इंडिया सीमेंट्स को झकझोरे पड़े थे। सीमेंट के धंधे के साथ-साथ आईपीएल की चेन्नई सुपर किंग टीम की मालिक इस कंपनी का शेयर तब 140 रुपए के आसपास चल रहा था। चक्री का दावा था, “अगले दो-तीन सालों में आईपीएल टीम के मूल्यांकन के दम पर इंडिया सीमेंट का शेयर 450 रुपए तक जा सकता है। अभी फिलहाल अगले कुछ महीनों में तो इसमें 100 रुपए के बढ़त की पूरीऔरऔर भी

आज फंडामेंटल और लांग टर्म गया तेल लेने। आज हम एकदम शॉर्ट टर्म में फायदा दिलानेवाले ऐसे स्टॉक की चर्चा करेंगे जो वित्तीय आंकड़ों के दम पर खास आकर्षण नहीं पैदा करता। लेकिन बाजार के उस्तादों के मुताबिक इसमें मुनाफा कमाने की गुंजाइश पक्की है। आइनॉक्स के मल्टीप्लेक्सों का नाम तो आपने सुना ही होगा। जाकर सिनेमा भी देखा होगा। इसे संचालित करनेवाली कंपनी का नाम है – आइनॉक्स लीज़र। बीते हफ्ते गुरुवार, 11 अगस्त को इसनेऔरऔर भी

बाजार अब सीधे मंगलवार को खुलेगा। अनिश्चितता का आलम है। ट्रेडरों ने ज्यादातर सौदे शुक्रवार को ही काट लिये क्योंकि उन्हें डर है कि मंगलवार को जब बाजार खुलेगा, तब तक अमेरिका व यूरोप के संकट का कोई नया पेंच न सामने आ जाए। सब कुछ शॉर्ट टर्म हो गया है। खबरों पर बाजार और अलग-अलग स्टॉक्स की गति निर्भर है। लेकिन शेयर बाजार सबसे बड़ा पेंच यह है कि अक्सर खबर के सार्वजनिक होने तक उसका असरऔरऔर भी

परसिस्टेंट सिस्टम्स इतनी मरी-गिरी कंपनी नहीं है कि उसका शेयर अगर जमीन पर गिर जाए तो उसे खोटा सिक्का मानकर उठाया ही न जाए। 1990 में बनी कंपनी है। सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेलपवमेंट सेवाओं में सक्रिय है। 6600 से ज्यादा कर्मचारी हैं। 300 से ज्यादा कस्टमर हैं जो अमेरिका, यूरोप व एशिया के कई देशों तक फैले हैं। उसने पिछले पांच सालों में 3000 से ज्यादा सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग व सॉफ्टवेयर आर एंड डी मेंऔरऔर भी

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एक तरह से ठेकेदारों जैसा ही काम करती हैं। लेकिन ठेकेदार की छवि हमारे दिमाग में नेताओं तक पहुंच और सरकारी धन की लूट करनेवाले गुंडे-मवाली की ही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही मूलतः ठेकेदार ही तो रहे थे। पर, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एकदम भिन्न व प्रोफेशनल तरीके से काम करती हैं। देश में जिस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर की खस्ता हालत को लेकर त्राहि-त्राहि मची है, उसमें इस क्षेत्र कीऔरऔर भी

कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील कंपनी सेल (स्‍टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) के लिए 55,000 करोड़ रुपए की निवेश योजनाओं को मंजूर कर लिया। इस्‍पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा संसद में बताते हैं कि सेल ने झारखंड में अपनी चिरिया लौह अयस्‍क खदानों के आधुनिकीकरण के लिए कई योजनाएं तैयार की हैं। खुद सेल के चेयरमैन सी एस वर्मा बता रहे हैं कि कंपनी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मोजाम्बिक व कोलंबिया तक में लौह अयस्क खदानें खरीदने कीऔरऔर भी

शेयर बाजार का माहौल अब भी इतना थिर नहीं हुआ है कि उसमें आराम से गोता लगाकर अच्छे शेयरों को सस्ते भाव पर पकड़ लिया जाए। सूचकांक में शामिल शेयरों की चाल अलग है। इससे अलग ब्रोकर भाई लोग मिड कैप व स्मॉल कैप शेयरों को बराबर धुने हुए हैं। सक्रिय निवेशक व ट्रेडर मार्जिन कॉल दे नहीं पा रहे हैं तो ब्रोकर ऐसे शेयरों को बेचे जा रहे हैं। वैसे एक-दो दिन में बाजार सामान्य होऔरऔर भी

आज का दिन शेयर बाजार में कत्लोगारद का दिन है। अमेरिका का संकट सारी दुनिया पर हावी है। मध्य-पूर्व के बाजारों में कुवैत में 2.51 फीसदी से लेकर इस्राइल की 6.59 फीसदी गिरावट ने झांकी दिखा दी है कि भारत व एशिया के बाजारों में क्या हो सकता है। हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में शेयर सूचकांक रविवार को बाजार खुले होने पर 2.2 फीसदी गिर चुका है। सेंसेक्स शुक्रवार को 2.19 फीसदी गिरकर 17,305.87 पर बंद हुआऔरऔर भी

शेयरों में निवेश कोई घाटा खाने या कंपनियों से रिश्तेदारी निभाने के लिए नहीं करता। अभी हर तरफ गिरावट का आलम है, अच्छे खासे सितारे टूट-टूटकर गिर रहे हैं तो ऐसे में क्या करना चाहिए? जो वाकई लंबे समय के निवेशक हैं, रिटायरमेंट की सोचकर रखे हुए हैं, उनकी बात अलग है। लेकिन अनिश्चितता से भरे इस दौर में शेयर बाजार में लांग टर्म निवेश का क्या सचमुच कोई मतलब है? लोगबाग दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेनऔरऔर भी

अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज का शेयर गिरता ही चला जा रहा है। इस साल जनवरी में 195.90 रुपए पर था। अभी 151 रुपए पर है, साल भर पहले 25 अगस्त 2010 को हासिल न्यूनतम स्तर 149 रुपए के करीब। जो रुझान है उसमें हो सकता है कि नया न्यूनतम स्तर ही बन जाए। किया क्या जाए? जिनके पास हैं, वे क्या करें और जिनके पास नहीं हैं, वे क्या करें। कंपनी यकीननऔरऔर भी