किसी भी आम ट्रेडर से पूछ लीजिए। वो आपको आराम से पंद्रह संकेतक गिना देगा जो बताते हैं कि किसी स्टॉक का भावी रुझान क्या है और उसे किस भाव पर कितने स्टॉप लॉस के साथ खरीदना/बेचना चाहिए? लेकिन यकीन मानिए, इनमें से कोई जादुई संकेतक नहीं है जो एकदम सटीक भविष्यवाणी कर सके। अपने-आप में हर संकेतक अधूरा है। उसे दो-तीन के साथ मिलाने पर ही तस्वीर थोड़ी साफ होती है। देखते हैं आज की तस्वीर…औरऔर भी

आगे क्या होगा, कोई नहीं जानता। अनिश्चितता पक्की है। इंसान अपने पूरे इतिहास में इसे ही मिटाने की कोशिश करता रहा है। ट्रेडिंग भी अनिश्चितता में संभावनाओं को पकड़ने की कोशिश है। कभी-कभी बड़े संकेतक भी धोखा दे जाते हैं। इसका मतलब कि सतह के नीचे कोई बड़ी चीज चल रही है। ऐसी सूरत में ट्रेडर को रुककर खटाक से पलट जाना चाहिए। बाज़ार से जिद करने का मतलब पिटना है। अब आज की अनिश्चितता में छलांग…औरऔर भी

नया शिकारी जंगल में हर हिलती-डुलती चीज़ पर गोली चला देता है, अपनी परछाई पर भी। वहीं कुशल शिकारी भलीभांति जानता है कि कौन-सा शिकार करना है। वो गिनती की गोलियां ही रखता है। उलझन नहीं, सरलता। अराजकता नहीं, अनुशासन। सफल ट्रेडर दस जगह हाथ-पैर नहीं मारता। चुने हुए इंडीकेटर व चुनिंदा स्टॉक्स। वो 50 के चक्कर में पड़ने के बजाय 5 स्टॉक्स में ही गहरी पैठ बनाता है। आगे है जून की पहली ट्रेडिंग के तिकड़म…औरऔर भी

मल्टीबैगर के चक्कर में बहुतेरे निवेश सलाहकार जमकर लोगों को उल्लू बनाते हैं। धन कई गुना करने की लालच में सीधे-साधे लोग तगड़ी फीस देकर निवेश कर देते हैं। उन्हें नहीं बताया जाता कि स्मॉलकैप या मिडकैप स्टॉक्स ही कई गुना बढ़ सकते हैं, जिनके गिरने का खतरा भी इतना ही भयंकर होता है। दूसरी तरफ लार्जकैप कंपनियों में निवेश के डूबने का खतरा नहीं, रिटर्न भी ठीकठाक मिलता है। पेश है ऐसी ही एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग या निवेश के लिए डीमैट एकाउंट का होना ज़रूरी है और अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक इस समय देश में कुल लगभग 2.11 करोड़ डीमैट एकाउंट हैं। इसका एक फीसदी भी पकड़ें तो हर दिन करीब दो लाख लोग ट्रेडिंग या निवेश करते होंगे। लेकिन इनमें से बमुश्किल दो हज़ार ही होंगे जो बाकायदा सोच-समझ कर धन लगाते या निकालते हैं। बाकी ज्यादातर लोग यहां अनाड़ियों की तरह मुंह उठाए चले जाते हैं। वैसेऔरऔर भी

शराब, ड्रग्स या ट्रेडिंग की लत लग जाए तो बरबाद होने में वक्त नहीं लगता। खुशी की तलाश में निकले लोग अक्सर खुद को ही गंवा बैठते हैं। दरअसल, ट्रेडिंग का बुनियादी सूत्र है कि जिस भाव पर डिमांड सप्लाई से ज्यादा होती है, वहां से भाव चढ़ते हैं। इसकी उल्टी सूरत में गिरते हैं। हमें इन स्तरों का पता लगाकर खरीदना/बेचना होता है। इसलिए यहां एडिक्ट नहीं, एकदम मुक्त दिमाग चाहिए। अब हफ्ते की आखिरी ट्रेडिंग…औरऔर भी

सफल ट्रेडर अपने प्रति निर्मम और बाज़ार के प्रति बेहद चौकन्ना रहता है। पक्का रिकॉर्ड रखिए। हर गलती से सीखिए और भविष्य में बेहतर कीजिए। यह नहीं कि धन गंवाने के बाद मुंह छिपाते फिरें। बहुत से लोग घाटा खाने के बाद परिचितों से ही नहीं, बाज़ार तक से कतराते हैं। लेकिन इस तरह छिपने-छिपाने से कुछ नहीं सुलझता। सफलता के लिए घाटे की पीड़ा को पिरोकर अनुशासन में बंधना पड़ता है। आगे है गुरुवार का चक्कर…औरऔर भी

आप ऐसे ट्रेडर तो नहीं जो खुद का नुकसान करने पर आमादा है? ट्रेडिंग से हुए फायदे-नुकसान का ग्राफ बनाएं। अगर कुल मिलाकर ग्राफ का रुख ऊपर है तो आप सही जा रहे हैं। अन्यथा, तय मानिए कि आप बाज़ार की चाल नहीं पकड़ पा रहे और अपना ही नुकसान करने की फितरत के शिकार हैं। गहराई से सोचिए और अपने नज़रिए की पड़ताल कीजिए। इस बीच सौदों का साइज़ फौरन घटा दीजिए। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

खराब किस्मत का रोना रोनेवाले अक्सर नाहक मुसीबत मोल लेने और जीत के जबड़े से हार खींच लाने में माहिर होते हैं। ज़रा सोचिए तो सही कि सफलता का बढ़िया ट्रैक-रिकॉर्ड रखनेवाले दिमागदार लोग भी ट्रेड में लगातार पिटते क्यों हैं? क्या यह अज्ञान है, खोटी किस्मत है या अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने की फितरत? नशेड़ियों की तरह ऐसे लोग खुद को ही खोखला करते चले जाते हैं। खैर, अब रुख करते हैं बाज़ार का…औरऔर भी

केवल सरकार के बांड सुरक्षित हैं। बाकी हर निवेश में यह रिस्क है कि जितना वादा है, कहा गया है या शुरू में सोचा है, उतना रिटर्न आखिरकार नहीं मिलेगा। अब यह निवेशक पर है कि वो आंख मूंदकर फैसला करे या सारे जोखिम का हिसाब-किताब पहले से लगाकर। इस मायने में ट्रेडर अलग हैं। वे सारा कुछ नापतौल कर न्यूनतम रिस्क लेते हैं। वे बड़ा जोखिम कतई नहीं उठाते। इस हफ्ते तो भयंकर उठापटक होनी है।…औरऔर भी