कहते हैं कि पक्का इरादा हो तो जीवन में हर चीज़ पाई जा सकती है। लेकिन वित्तीय ट्रेडिंग से कमाने का ‘पक्का इरादा’ अक्सर पाने नहीं, बल्कि गंवाने का ज़रिया बन जाता है। मंज़िल के जुनून में हम बहुत जल्दी, बहुत ज्यादा रिस्क उठाने लगते हैं। नतीजतन, हमारी ट्रेडिंग पूंजी ही डूब जाती है, हम हाथ मलते रह जाते हैं जबकि यहां ट्रेडिंग पूंजी को सलामत रखते हुए टिके रहना सबसे महत्वपूर्ण है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्तीय बाजार की ट्रेडिंग आपके मन का आईना है, जहां आपकी हर भावनात्मक कमज़ोरी देखने को मिल जाती है। विचारों का स्तर क्या है, भावनाओं का स्वरूप क्या है, आपकी वृत्तियां क्या हैं और आपकी स्मृतियों में क्या-क्या पड़ा है, यह सारा कुछ ट्रेडिंग में झलक जाता है। अगर मनोगत स्थिति से ऊपर उठकर आपने जो जैसा है, उसे वैसा देखने का वस्तुगत सलीका नहीं अपनाया तो ट्रेडिंग में बराबर मात खाते रहेंगे। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

जानकारी हासिल करना आजकल बड़ा आसान है। गूगल पर सर्च करो और पलक झपकते हज़ारों सूचनाएं हाज़िर। लेकिन मंथन के बाद उन्हें ज्ञान तक पहुंचाने व हुनर बनाने में भरपूर वक्त लगता है। इस दौरान किसी साधना जैसा अनुशासन बरतना होता है। इसी तरह ट्रेडिंग में जब तक अपने माफिक पद्धति पा न ली जाए, तब तक धैर्य धरना पड़ता है। लेकिन प्रायः किनारे पर पहुचने से ठीक पहले कश्ती डूब जाती है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

लोगबाग मुनाफे को प्यार करते हैं और घाटा उठाना पसंद नहीं करते। इसलिए मुनाफा होने पर फटाफट बुक कर लेते हैं, जबकि घाटे की पोजिशन को काटने के बजाय टालते रहते हैं। इसके विपरीत प्रोफेशनल ट्रेडर घाटा काटने में देर नहीं लगाते और मुनाफे को अंतिम छोर तक खींच ले जाते हैं। घाटा न्यूनतम, मुनाफा अधिकतम। वे ट्रेड की योजना बनाते और योजना के अनुरूप ट्रेड करते हुए अपना लक्ष्य हासिल करते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग में उतरनेवाला हर शख्स सस्ते में खरीदने और महंगे में बेचने की सोचता है। लेकिन बाज़ार में सस्ते में खरीदना तभी होता है, जब हर कोई बेच चुका होता है। चार्ट पर सभी कैंडल लाल दिखते हैं। कंपनी संबंधी बदतर खबरें चलती रहती हैं। लेकिन ऐसे माहौल में हमारा सहज दिमाग खरीदने नहीं, भागने को कहता है। जीवन के दूसरे क्षेत्रों में हम सेल में खरीदते हैं। मगर शेयर बाज़ार में नहीं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर जीवन के अन्य क्षेत्रों में आपका अपने ऊपर नियंत्रण नहीं है तो इस गफलत में मत रहिए कि वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में इसे हासिल कर लेंगे। यहां तो हर पल आत्मनियंत्रण ही नहीं, आपके जीवन की अब तक की सीख की परीक्षा होगी। अमूमन हम अच्छी लगनेवाली चीज़ के पीछे और हर डरानेवाली चीज़ से दूर भागते रहे हैं। ट्रेडिंग व निवेश में सफलता के लिए हमें इसका उल्टा करना होगा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में उतरनेवाले अक्सर केवल उसके फायदे देखते हैं। नहीं देखते कि उसमें चुनौतियां क्या हैं। नहीं समझते कि ये ऐसी चुनौतियां हैं जो बैंक बैलेंस ही नहीं, उनके आत्मविश्वास तक को ध्वस्त कर सकती हैं। बाजार की हकीकत यह है कि यहां जो लड्डू देखकर आते हैं, वे धन गंवाते हैं और उनका धन वे लोग ले जाते हैं जो इसकी चुनौतियों को ध्यान में रखकर ट्रेड करते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जब कोई शेयर या कमोडिटी जैसे वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिग करने की सोचता है तो उसके मन में हर तरफ से लड्डू ही लड्डू फूटते हैं। कितना मज़ा आएगा! न कोई बॉस, न सुबह-सुबह ऑफिस जाने का झंझट! घर पर बैठकर अपने लैपटॉप से ट्रेडिंग। बचत से ढाई लाख रुपए भी लगाए तो महीने में 10% कमाने पर ही 25,000 आ जाएंगे। बाकी मूलधन सुरक्षित। इससे ज्यादा और क्या चाहिए रिटायरमेंट के बाद। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार में हर दिन 1700 से ज्यादा कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग होती है। इनमें से सैकड़ों उठते और सैकड़ों गिरते हैं, जबकि 80-90 स्थिर रहते हैं। हमें उठनेवाले शेयरों को पकड़ना है क्योंकि गिरते शेयरों में खेलने का जोखिम उठाना हमारे वश की बात नहीं। उठनेवाले शेयरों में भी हम हर तरफ मुंह नहीं मार सकते हैं। हमें अपने माफिक पड़नेवाले 15-20 शेयरों को ही चुनकर उनमें ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडर अगर वित्तीय बाज़ार से कमाना चाहते हैं तो उन्हें बहती गंगा में हाथ धोने का हुनर सीखना पड़ेगा। धार, जिसकी दिशा व उफान वित्तीय संस्थाएं, बैंक व एचएनआई निवेशक तय करते हैं। उन्हें अपना सारा दिमाग खबरों पर नहीं, बल्कि इन शक्तियों की चाल को समझने पर लगाना चाहिए। चूंकि बाज़ार में सारे सौदे दर्ज होते और भावों के चार्ट पर झलकते हैं, इसलिए बड़ों की चाल को समझना मुश्किल नहीं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी