बाज़ार का मूड बड़ा अस्थिर है। ऐसे में मान लीजिए, आपने 5-10 दिन की ट्रेडिंग के लिए कोई शेयर खरीदा है तो उसमें स्टॉप-लॉस उठाते जाने के साथ आपको उसका ट्रिगर भी लगाना चाहिए। जैसे, ‘एबीसी’ कंपनी का शेयर आपने 120 पर 132 के लक्ष्य के साथ खरीदा। पहला स्टॉप-लॉस 118 का। बढ़कर 128 तक पहुंचा तो आपने स्टॉप-लॉस 125 का कर दिया। लेकिन साथ ही स्टॉप-लॉस ट्रिगर 125.45 का रख देना चाहिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमारा बाज़ार बराबर उस कगार तक खिसकता जा रहा है, जहां पर कोई नकारात्मक खबर आते ही निफ्टी व सेंसेक्स 10% से ज्यादा टूट सकते हैं। ऐसा होना लंबे समय के निवेशकों के लिए बड़ा सुखद होगा। लेकिन ट्रेडरों का क्या होगा? तब तो सारे स्टॉप-लॉस टूट जाते हैं। बाज़ार निकलने का मौका नहीं देता। इसीलिए नियम है कि शेयर बाजार में लगाने के लिए रखे धन का 5% ही ट्रेडिंग में लगाएं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था जब जमकर बढ़ रही हो, तब शेयर बाज़ार चढ़ता जाए तो उसके टिके रहने पर काफी हद तक भरोसा किया जा सकता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां जब देश की रेटिंग को निवेश के सबसे निचले पायदान से उठाने को तैयार न हों, तब बाज़ार की दशा-दिशा को लेकर हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए। बता दें कि पिछले दस सालों में निफ्टी छह बार एक दिन में 10% से ज्यादा गिर चुका है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्र में अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने पर इसे बड़ी उपलब्धि बताया कि शेयर बाज़ार ने ऐतिहासिक ऊंचाई छू ली है। सेंसेक्स 31,000 और निफ्टी 9600 के पार जा चुका है। लेकिन पिछले के पिछले गुरुवार को ब्राज़ील का शेयर बाज़ार जिस तरह अचानक 10% से ज्यादा गिर गया था, वैसा अपने यहां हो गया तो! सोचिए कि क्या तब इसे सरकार की नाकामी माना जाएगा? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में अगर आप यह सोचकर आते हैं कि मैं दस लाख रुपए लगा रहा हूं और मुझे साल के अंत 400% रिटर्न चाहिए तो पक्का समझें कि बाज़ार आपको निचोड़ डालेगा। दरअसल, उसमें लाखों लोग, हज़ारों शक्तियां सक्रिय हैं। बाज़ार को अपने तरीके से काम करने दें। आप अपनी योजना के हिसाब से चलें। अगले आधे समय भी आपकी योजना सही बैठ गई तो आप ट्रेडिंग से ठीकठाक मुनाफा कमा लेंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

स्टॉप-लॉस का मकसद है सौदा उल्टा पड़ने पर नुकसान को न्यूनतम रखना। लेकिन इसे तय करने का कोई पक्का फॉर्मूला नहीं। हालांकि हम वही सौदे चुनते हैं जिनमें 1.5-2% घाटे की आशंका होती है। लेकिन हकीकत में स्टॉप-लॉस का स्तर अलग-अलग स्टॉक के स्वभाव पर निर्भर करता है। भावों में ज्यादा उछलकूद या वॉलैटिलिटी होती है तो उनमें इसका स्तर ज्यादा होता है। पर हम ऐसे स्टॉक्स से दूर भी रह सकते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

स्टॉप-लॉस हिट हुआ तो हुआ। आपको अगले बीस साल तक बाज़ार में रहना है। इस दौरान स्टॉप-लॉस लगते रहेंगे। आपको उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। पैसा बना तो बना, नहीं तो बाज़ार गया तेल लेने। ज़िंदगी आगे बढ़ती रहती है। आपको इस मनोविज्ञान के साथ ट्रेडिंग करनी चाहिए। इस धारणा के साथ बाज़ार में आते हैं तो खोएंगे कुछ नहीं, पाकर जाएंगे। याद रखें, ट्रेडिंग में सफलता का पैसे से कोई लेनादेना नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

यह समझें कि स्टॉप-लॉस एक तरह का बीमा है। हम स्टॉप-लॉस लगाते ही इस तरह हैं ताकि उसके हिट होने की नौबत न आए। लेकिन अगर खुदा न खास्ता हिट हो गया तो बड़े नुकसान से बच जाएं। दो-चार करोड़ की पॉलिसी खरीदने का मतलब यह नहीं कि हमें असमय मरना है, बल्कि यह कि अगर हम किसी आकस्मिकता में निपट लिए तो परिवार पर अचानक आर्थिक मुसीबत न आ जाए। अब समझते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ज़नाब बोले: मेरे बाप बड़े बहादुर थे। जंगल में अकेले जाकर शेर से भिड़ गए। पूछा: फिर क्या हुआ तो बोले: शेर उन्हें मारकर खा गया। शेयर बाज़ार में भी ऐसे बहादुर ‘शहीदों’ की कोई कमी नहीं। आए दिन होते रहते हैं। ऐसे लोग स्टॉप-लॉस लगाने को अपनी तौहीन समझते हैं। दरअसल, इस मानसिकता में इंसान खुद को तुर्रमखां समझता है। लेकिन बाज़ार उनकी रत्ती भर भी परवाह किए बगैर चलता जाता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

आप सुनते-सुनते एकदम पक गए होंगे कि वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार बहुत रिस्की है। हालांकि ज़िंदगी भी बहुत रिस्की है क्योंकि हर अगले पल हम अनिश्चितता की भंवर में छलांग लगाते हैं। लेकिन अपना विचार, नज़रिया व तरीका हम सही कर लें तो ज़िंदगी का रिस्क सहज बन जाता हैं। इसी तरह निरंतर शिक्षा से बाज़ार के प्रति हम अपना बर्ताव सही कर लें तो उसका रिस्क पकड़ में आ जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी