शेयर बाज़ार में तेज़ी का दौर अक्सर कुछ लंबा ही खिंच जाता है। पी/ई जैसी तमाम गणनाएं फेल हो जाती हैं और बाज़ार उम्मीद से ज्यादा महंगा होता चला जाता है। कोई भी ट्रेडर इस तेज़ी का फायदा उठाना चाहेगा। लेकिन इस दौरान ट्रेड करना काफी रिस्की हो जाता है। इसलिए इस दरम्यान ट्रेडिंग में हमें शेयर बाज़ार में लगाने के लिए निकाले धन का कम से कम हिस्सा लगाना चाहिए। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले साल एलआईसी, बैंकों व म्यूचुअल फंडों जैसी देशी वित्तीय संस्थाओं ने शेयर बाज़ार में जमकर खरीद की तो इस साल की शुरुआत से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बाज़ार में डॉलर झोंके पड़े हैं। हालांकि वे सरकारी व कॉरपोरेट बांडों में भी जमकर निवेश कर रहे हैं क्योंकि इधर बांडों के सस्ते होने उनकी प्रभावी यील्ड बढ़ती जा रही है। लेकिन उनकी साफ राय है कि भारतीय शेयर बाज़ार शानदार रिटर्न दे सकता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की अभी की तेज़ी में बैंकिंग व फाइनेंस कंपनियों के शेयर कुछ ज्यादा ही चढ़ गए हैं। 3 अप्रैल 2017 से जनवरी में पिछले हफ्ते तक बैंक निफ्टी 27.4% बढ़ा है। इसी दरम्यान एचडीएफसी बैंक 37.7%, ग्रुह फाइनेंस 73.8%, बजाज फाइनेंस 50.9% और मोतीलाल ओसवाल 89.8% बढ़े हैं। इस तरह बाज़ार के बुलबुले का दायरा काफी सीमित है तो हमारे लिए निवेश या ट्रेडिंग के मौके ज्यादा कम नहीं हुए हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे सामाजिक संगठन के प्रमुख मोहन भागवत बीएसई पहुंचकर स्टॉक एक्सचेंज के बाहर बने सांड के सींग पकड़कर फोटो खिंचवाने लग जाएं तो समझ लेना चाहिए कि शेयर बाज़ार में तेज़ी का पारा कितना ऊपर चढ़ चुका है। बाज़ार कितना और कब तक ऊपर जाएगा, यह कोई नहीं बता सकता। जब तक देशी या विदेशी संस्थाओं की खरीद जारी रहेगी और बिकवाली पर भारी पड़ेगी, तब तक बाज़ार बढ़ेगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

क्या शेयर बाज़ार की मौजूदा बढ़त में बहुत सारे लोग कमा रहे हैं? जवाब है कतई नहीं। सच कहा जाए तो इस बढ़त में कमानेवालों की संख्या मुठ्ठीभर होगी। बाज़ार जब गिरने लगेगा, तब तो गिरावट से कमानेवालों की संख्या और भी कम होगी। कारण, गिरावट में शॉर्ट सेलिंग से बड़े ही कमाते हैं। आम ट्रेडर सोचते हैं कि ऑप्शंस खरीदकर वे कमा लेंगे। लेकिन गिरावट में ऑप्शंस बेचनेवाले कमाते हैं, खरीदनेवाले नहीं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार बराबर बढ़ता और नई ऊंचाइयां छूता जा रहा है। हर कोई चहक रहा है। लेकिन अभी जितना बढ़ा है, उसका आधा भी गिर जाए तो बढ़ने की सारी खुशी काफूर हो जाएगी। वित्तीय बाज़ार में लोगों का सामान्य मनोविज्ञान है कि घाटा खाने की तकलीफ मुनाफे की खुशी से दोगुनी होती है। किसी शेयर में 2% स्टॉप-लॉस लगने का दुख दूसरे शेयर में 4% बढ़ने के सुख को पटरा कर देता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

इस समय शेयर बाज़ार में दो तरह के ट्रेडर/निवेशक सक्रिय हैं। एक वे जिन्होंने एकदम आक्रामक अंदाज़ अपना रखा है। लगता है कि इन्हें कुछ गंवाने का डर-भय है ही नहीं। दूसरे वे हैं जो बहुत सावधानी से फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। आक्रामक अंदाज़वाले हर दिन बाज़ार में धन डालते जा रहे हैं, वहीं सावधानी बरतनेवाले मौका मिलने ही थोड़ा-थोड़ा बेचकर निकलते जा रहे हैं। आखिर सही व संतुलित रास्ता क्या है? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार ऐसी ऊंचाई पर है जहां बहुतों को डर लगता है कि कभी भी धराशाई हो सकता है। लेकिन कुछ ऑपरेटरों और संस्थाओं की खरीद बराबर जारी है और हर दिन सेंसेक्स व निफ्टी नया शिखर बना रहे हैं। लगता है कि अब सेंसेक्स को 40,000 तक पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। बस, 14-15% ही तो बढ़ना है। मुमकिन है कि बजट तक या उससे बाद यह कमाल-धमाल हो जाए। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अहम सवाल। कमज़ोर अर्थव्यवस्था के बीच लगातार चढ़ते बाज़ार में कैसे ट्रेड करें? एक तरीका यह है कि ट्रेडिंग से परहेज़ करें, कैश संभालकर रखें और चुनिंदा मजबूत कंपनियों में लंबे निवेश का मौका पकड़े। दूसरा तरीका यह है कि ट्रेडिंग की अवधि पांच-दस दिन से घटाकर दो-चार दिन की कर दें। तीसरा तरीका है कि पांच-दस आजमाई हुई कंपनियों में ही ट्रेड करें और बहुत ज्यादा उधर-उधर हाथ-पैर न फैलाएं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बढ़ते बाज़ार में लहरों के हिसाब से नीचे आने पर खरीदने का सौदा बहुत कारगर नहीं होता। जब शेयर बराबर नया उच्चतम स्तर बना रहे हों, तब ब्रेकआउट ट्रेड ही सबसे कारगर रणनीति होती है। रोज़ाना के भावों के चार्ट पर उठते त्रिभुज का पैटर्न ब्रेकआउट की दस्तक देता है, लेकिन किसी भी हालत में ऊपर और नीचे आने की प्रायिकता 50:50 से बेहतर नहीं होती। मतलब ट्रेड करना बहुत-बहुत रिस्की होता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी