कहीं यह गिरावट का आगाज़ तो नहीं!
बाज़ार के कुछ लोग पुराने अनुभव से बताते हैं कि गुजरात चुनावों से पहले के पंद्रह दिनों में शेयर बाज़ार अक्सर चढ़ता है, जबकि चुनाव बीतने के बाद के तीस दिनों में अमूमन गिरता है। हालांकि ऐसी मान्यताओं का कोई तार्किक आधार नहीं होता। लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक पहलू ज़रूर होता है। सोचने की बात है कि साल भर से बढ़ रहे बाज़ार में कहीं इस गिरावट का आगाज़ तो नहीं हो गया है? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
