यह शेखी बघारने का वक्त नहीं है। अगर हमारे नीति-नियामक भारत के विकास-पथ को लेकर संजीदा नहीं हुए तो हमारी सारी विकासगाथा कायदे से टेक-ऑफ करने से पहले ही मिट्टी में मिल सकती है। हमें चौकन्ना हो जाना चाहिए क्योंकि करीब डेढ़ महीने भर पहले ही 16 मई को रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की संप्रभु रेटिंग एएए के सर्वोच्च स्तर से घटाकर दूसरे पायदान पर एए1 करऔरऔर भी

देश में सबसे भयंकर दुर्दशा डेमोग्राफिक डिविडेंड मानी गई उस युवा आबादी की हो रही है, जिनकी आकांक्षाओं के दम पर भारत की सारी विकासगाथा लिखी गई है। हमारे 60 करोड़ देशवासियों की उम्र 25 साल से कम है। यह वो ताकत है जो देश को आर्थिक महाशक्ति बना सकती है। लेकिन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ताजा ‘इंडिया इम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024‘ के मुताबिक भारत की श्रमशक्ति में हर साल जुड़नेवाले 70-80 लाखऔरऔर भी

भारत भले ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था हो। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश में आर्थिक मोर्चे पर सब ठीकठीक चल रहा है। जिस कृषि क्षेत्र पर हमारी 46.1% श्रमशक्ति और करीब 65% आबादी निर्भऱ है, वो तो पहले भी भगवान भरोसे थी और अब भी रामभरोसे ही है। लेकिन जिस सेवा क्षेत्र और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पर देश की विकासगाथा और विकास-यात्रा को आगे बढ़ाने का दारोमदार है, उसकी ठहरी या पस्तऔरऔर भी

देश में जीडीपी पर भरपूर हवाबाज़ी बदस्तूर जारी है। लेकिन बेरोज़गारी पर कोई बहस नहीं। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया। लेकिन पिछले 11 सालों में जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का योगदान बराबर घटता गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2025 तक जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा 25% पर पहुंचा देंगे। हकीकत यह है कि यह 2011-12 में जीडीपी का 17.4% हुआ करताऔरऔर भी

भारत स्वरोज़गार-प्रधान देश पहले भी था और अब भी है। पर अभी तक किसी सरकार ने स्वरोज़गार का श्रेय लेने की जुर्रत नहीं की थी। मगर श्रेय लेने क राजनीति में ही पले-बढ़े नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने आम लोगों के स्वरोज़गार का सारा श्रेय खुद ले लिया। इसी आधार पर उनके अर्थशास्त्री गिनाते हैं कि 2014 से 2024 के दौरान देश में 17.19 करोड़ नए रोज़गार पैदा हुए हैं। यानी, हर साल औसतन 1.72 करोड़औरऔर भी

हमारे गृह मंत्री अमित शाह हवा-हवाई प्रचार के गुब्बारे में छेद करने में माहिर हैं। दस साल पहले जब हर तरफ प्रधानमंत्री बन चुके नरेंद्र मोदी का जलवा-जलाल छाया हुआ था, तब उन्होंने 5 फरवरी 2015 को एबीपी न्यूज़ पर प्रसारित एक इंटरव्यू में कह दिया कि मोदीजी ने अपनी चुनाव सभाओं में हर किसी के एकाउंट में 15 लाख डालने की जो बात कही थी, वो एक जुमला थी। अभी पिछले हफ्ते शुक्रवार को उन्होंने अंतरराष्ट्रीयऔरऔर भी

मोदी सरकार नए भारत की आकांक्षाओं को अतीत की अंधेरी गलियों की भूल-भुलैया में भटकाने में लगी है। भारत अभी दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं है। फिर भी वो ऐसा हो जाने का गला फाड़ रही है। उसने विकसित भारत@2047 को ‘अच्छे दिन’ का नया वर्जन बना दिया है। आखिर वो भारत की आंतरिक शक्ति पर फोकस क्यों नहीं कर रही? गांवों से लेकर शहरों तक लोगों की आय कैसे बढ़े, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार काऔरऔर भी

आज जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी ताकत की धौंस दिखाकर लैटिन अमेरिका व यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों को व्यापार युद्ध में धकेल दिया है, तब भारत को अर्थव्यवस्था के विकास की रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ेगा। हमें पता होना चाहिए कि अमेरिका ने पिछले साल 4.1 ट्रिलियन डॉलर के माल व सेवाओं का आयात किया था, जो दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारतऔरऔर भी

रिजर्व बैंक का डेटा बताता है कि भारत में आया शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वित्त वर्ष 2024-25 में मात्र 35.3 करोड़ डॉलर रहा है, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह 1010 करोड़ डॉलर रहा था। साल भर में 96.5% की भारी कमी। देश में शुद्ध एफडीआई चार साल से बराबर घट रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में यह 4400 करोड़ डॉलर, 2021-22 में 3860 करोड़ डॉलर और 2022-23 में 2800 करोड़ डॉलर रह गया।औरऔर भी

मोदी सरकार ने 11 साल पूरे होने पर ब़ड़े-बड़े सीरियल विज्ञापन निकाले हैं। इनमें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को चार चांद लगा देने का दावा किया गया है। 66 लाख किलोमीटर से ज्यादा की सड़कें, 1.46 लाख किलोमीटर हाईवे, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग, 25 शहरों में 1000 किलोमाटर से ज्यादा का मेट्रो नेटवर्क, हवाई अड्डों की संख्या 162 के पार, 1.50 करोड़ लोगों ने सस्ती विमान सेवाओं का लाभ उठाया। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के इस तामझाम की क्वालिटी कैसी औरऔरऔर भी