शेयर बाज़ार को लेकर हमारी धारणा न जाने कब साफ और व्यावहारिक बन पाएगी। मान्यता है कि लंबे निवेश का आदर्श है कि हमेशा के लिए निवेश। लेकिन निवेश कोई सात जन्मों का बंधन नहीं कि बंधे तो बंध गए। हो सकता है कि कंपनी का दमखम समय के साथ चुक जाए। तब उसके साथ चिपके रहने का क्या फायदा! निवेश के फलने-फूलने के लिए तीन-चार साल काफी होते हैं। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में हम अमूमन इसलिए निवेश करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि यहां फटाफट धन बनाया जा सकता है। भूल जाते हैं कि शेयर कंपनी का है और लंबे समय में वह तभी बढ़ेगा, जब कंपनी का धंधा बढ़ेगा। ‘तथास्तु सेवा’ इस धारणा से आगे बढ़कर आपको मात्र निवेशक नहीं, बल्कि संभावनाओं से भरी कंपनी का मालिक बनाना चाहती है। अभी के चढ़े बाज़ार में भी हमें कुछ ऐसी कंपनियां दिखीं, जिनमें काफी दम है…औरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भारत की संप्रभु रेटिंग बीएए3 से एक पायदान उठाकर बीएए2 कर दी है। ब्रिक्स देशों में चीन की रेटिंग भारत से ऊपर और ब्राज़ील व रूस की रेटिंग भारत से नीचे है। वहीं दक्षिण अफ्रीका की रेटिंग इसी जून तक बीएए2, यानी हमारे अभी के बराबर हुआ करती थी, जिसे उसके बाद मूडीज़ ने घटा कर बीएए3 कर दिया। इसलिए बहुत चहकना वाजिब नहीं है। अब तथास्तु में आज की निवेशयोग्य कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के निवेश का रिस्क कभी मिटता नहीं। यह कभी एक सीमा से ज्यादा घट नहीं सकता। कभी-कभी तो यह ज्यादा ही बढ़ा होता है। मसलन, फिलहाल निफ्टी-50 सूचकांक 26.87 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इससे पहले 14 जनवरी 2008 को वो 27.89 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हुआ है। ज़ाहिर है कि बाज़ार के गिरने का रिस्क अभी बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। ऐसे में तथास्तु में सावधानी से चुनी गई कंपनी…औरऔर भी

ज़िंदगी कोई आलू का पराठा नहीं कि किसी ने बनाया और आप खा गए। अर्थव्यवस्था भी इतनी पालतू नहीं कि सरकार ने कहा और वो उछलने लग जाए। बराबर ऐसा कुछ आता रहता है कि पुराना मिटकर नए में समा जाता है। नया पुराने को समेट कर आगे बढ़ता रहता है। इसलिए निवेश और उससे जुड़ी सोच में भी बराबर नयापन लाते रहना चाहिए। नए संवत 2074 का यही संदेश है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

पानी ऊपर से नीचे बहता है। लेकिन बचत हमेशा कम से ज्यादा रिटर्न की तरफ बहती है। इधर ब्याज दर घटने पर लोगबाग एफडी से धन निकालकर म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में लगाने लगे हैं। शेयरों की ज्वाला पर भी पतंगे टूटे पड़े हैं। इससे म्यूचुअल फंडों और ब्रोकरों की कमाई बढ़ गई है। लेकिन निवेशकों की कमाई अंततः बढ़ पाएगी या 2008 जैसा हश्र होगा? यह अहम सवाल है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार को लेकर बहुतों को लगता है कि यहां हर महीने आराम से 15-20% रिटर्न कमाया जा सकता है। कुछ तो ऐसा स्टॉक पूछते हैं जिसमें दो-तीन महीने में धन कई गुना हो जाए। इस लालच का फायदा उठाकर ठग उनकी सारी जमापूंजी साफ कर जाते हैं। जब अच्छे से अच्छे बिजनेस में सालाना रिटर्न 20-25% से ज्यादा नहीं होता तो कोई शेयर इसे कैसे मात कर सकता है? अब तथास्तु में आज एक बड़ी कंपनी…औरऔर भी

जिस तरह खुद दवा लेना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, उसी तरह मनमर्जी से निवेश करना वित्तीय सेहत के लिए घातक हो सकता है। लेकिन आज डॉक्टर तो हर बाज़ार व मोहल्ले में मिल जाएंगे, जबकि वित्तीय सलाहकार नहीं मिलते। बहुत हुआ तो बीमा एजेंट मिलते हैं जिनका मुख्य मकसद कमीशन कमाना है। ऐसे में आम निवेशक को मजबूरन खुद अपना वित्तीय सलाहकार बनना पड़ता है। बड़ी कठिन चुनौती है यह। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

निवेश करना, कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, टाइप चीज़ नहीं है। न ही जोश का निवेश फलदायी होता है। शेयर बाज़ार में निवेश करते वक्त आप ऐसी कंपनी पर दांव लगा रहे होते हैं जिसका प्रबंधन आप से स्वतंत्र है। इसलिए दो बातों को समझना ज़रूरी है। एक, उसका बिजनेस मॉडल कितना चौकस है। दो, निवेश तभी करें जब शेयर का भाव पर्याप्त सुरक्षा मार्जिन दे रहा हो। अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

अगर आपको लंबे समय का कामयाब निवेशक बनना है तो पहले कुशल जासूस बनना होगा। हर कंपनी एक अलग तरह का रहस्य है जिसे आपको सुलझाना है। आपको सही सवाल पूछने की कला विकसित करनी होगी। अपने दिमाग को इस तरह प्रशिक्षित करना होगा कि वह कंपनियों के बीच उभर रहे पैटर्न को खटाक से पकड़ सके। करना आपको ही होगा। बाहर से तो केवल मदद ही मिल सकती है। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी