ऋण से दबी कंपनी तो करें तौबा
कंपनियां यूं ही अचानक नहीं डूब जातीं। उनके डूबने का एक अहम कारण है ऋण। कंपनी ऋण के भारी बोझ से दबी है और उसका परिचालन लाभ तय देय ब्याज के दो-तीन गुना से ज्यादा नहीं है तो वह डूब सकती है। इसलिए हमें कभी भी एक गुने से ज्यादा ऋण-इक्विटी अनुपात वाली कंपनी में निवेश नहीं करना चाहिए। साथ ही उसका धंधा अगले 15-20 सालों तक प्रासंगिक बने रहना चाहिए। अब तथास्तु में एक शानदार कंपनी…औरऔर भी









