हालात कितनी तेज़ी से बदलते हैं! छह महीने पहले तक शेयर बाज़ार चमाचम था। सभी निवेशक मस्त थे। लेकिन आज अधिकांश निवेशक रो रहे हैं। खासकर, स्मॉलकैप कंपनियों के निवेशक ज्यादा ही दुखी हैं। पिछले छह से नौ महीनों में इनके शेयरों को काफी चोट लगी है। इसकी खास वजह है कि इधर इनके धंधे पर भी मार लगी है। लेकिन यह चक्र टूटेगा। तथास्तु में आज ऐसी कंपनी जो इस चक्र को यकीनन तोड़ सकती है…औरऔर भी

तमाम बैंक वेल्थ मैनेजमेंट की बात करते हैं। वे बड़े ग्राहकों के लिए वेल्थ या रिलेशनशिप मैनेजर तक तय कर देते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसे वेल्थ मैनेजर ग्राहकों की दौलत बढ़ाने के बजाय बैंकों का ही धंधा बढ़ाने का काम करते हैं। ऐसा वे ग्राहकों के हितों की कीमत पर करते हैं। बैंक के कर्मचारी होने के नाते वे उसे सबसे ऊपर, लेकिन ग्राहकों को कहीं का नहीं रखते। अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

कुछ हफ्ते या महीने भर बाद शेयर बाज़ार कहां जाएगा, इसे बता पाना किसी के लिए भी संभव नहीं। हो सकता है कि बाज़ार गिरता जाए या ऊपर चढ़ जाए। पर एक बात गांठ बांध लें कि घबराहट में अपना पोर्टफोलियो खाली नहीं करना चाहिए। अगर आपने किसी कंपनी की मूलभूत मजबूती व संभावना को समझकर उसके शेयर खरीदे हैं और वह स्थिति बदली नहीं है तो उसे कतई न बेचें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अगस्त के शिखर से गिरने के बाद शेयर बाज़ार में बहुत-सी कंपनियों का मूल्यांकन काफी आकर्षक हो गया है। अभी उनको खरीदना लंबे समय के लिए अच्छा सौदा साबित हो सकता है। लेकिन ऐसा नहीं कि जैसे ही आप खरीदेंगे, वैसे ही वे बढ़ना शुरू कर देंगे। इसलिए इस समय निवेश की सबसे अच्छी रणनीति एसआईपी है जिसमें एक बार नहीं, बल्कि क्रमिक रूप से चरणों में खरीद की जाती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अगर कोई कंपनी ऐसी दिखे जिसके फंडामेंटल मजबूत हैं, प्रबंधन शानदार है, ट्रैक रिकॉर्ड जानदार है, भावी विकास की भरपूर संभावना नज़र आ रही है और शेयर का भाव अभी सुरक्षा का पर्याप्त मार्जिन दे रहा है तो बाज़ार की उठापटक या भीड़ की सोच की परवाह किए बिना हमें उसमें तीन से पांच साल के लिए निवेश कर देना चाहिए। दौलत बनाने का बाकी कमाल चक्रवृद्धि का जादू कर देगा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

जब तक हम शेयरों के भाव के पीछे भागेंगे, तब तक बाज़ार को नहीं पकड़ सकते। वहीं, अगर हम कंपनी के कामकाज व संभावना के आकलन के आधार पर उसके शेयर का अंतर्निहित मूल्य निकालें और उससे भाव की तुलना करें तो बाज़ार को अपनी मुठ्ठी में कर सकते हैं। इसलिए बाज़ार कहां जाएगा, इसका कयास लगाने के बजाय हमें शेयरों के अंतर्निहित मूल्य के आधार पर लंबा निवेश करना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अगस्त अंत से चालू अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते तक बीएसई में लिस्टेड 2733 कंपनियों में से 688 कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते के शीर्ष से 61% से ज्यादा, 495 के शेयर 51-60%, 485 के 41-50%, 440 के 31-40%, 342 के 21-30% और 171 के शेयर 11-20% गिर चुके हैं। इनमें से कुछ को खराब आर्थिक स्थिति तो बहुतों को बाज़ार के मौजूदा सेटिमेंट ने मारा है। आज तथास्तु में इनमें से निवेश के दो अच्छे अवसर…औरऔर भी

महीने भर से गिर रहा शेयर बाज़ार कितना और गिरेगा, कहा नहीं जा सकता। सोमवार, 3 सितंबर से शुक्रवार, 5 अक्टूबर तक बीएसई सेंसेक्स 10.27%, मिडकैप सूचकांक 16.67% और स्मॉलकैप सूचकांक 19.37% गिर चुका है। आशा अब निराशा में बदलने लगी है। ठीक महीने भर बाद दिवाली है। डर है कि इस बार की दिवाली कहीं काली न पड़ जाए। लेकिन संभलकर चुना जाए तो शुभ लाभ के बहुतेरे अवसर हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

लगातार गिरता रुपया, कच्चे तेल व पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम, विदेशी निवेशकों का निकलते जाना। इन प्रतिकूल स्थितियों से घबराया शेयर बाज़ार क्या जल्दी संभल पाएगा? सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को ऋण देनेवाली आईएल एंड एफएस जैसी बड़ी कंपनी का संकट क्या गुल खिला सकता है? स्मॉंल और मिडकैप कंपनियों के शेयरों का गिरना कब रुकेगा? इस धुंध भरे महौल में अच्छी कंपनियां भी पीटी जा रही है। तथास्तु में आज इन्हीं में से एक दमदार कंपनी…औरऔर भी

दुनिया के सफलतम निवेशक वॉरेन बफेट का यह कहना शेयर बाज़ार का नीति-वाक्य बन चुका है कि जब सभी डर कर बेच रहे हों, तब लालची बन खरीद लेना चाहिए और सभी लालच में फंसे हों, तब बेचकर निकल लेना चाहिए। ऐसा सटीक मौका कभी-कभार ही मिलता है। लेकिन अपने यहां बीते हफ्ते घबराहट में चली बिकवाली ने लालची बनने के कुछ ऐसे ही मौके पेश कर दिए हैं। आज तथास्तु में उन्हीं में से एक मौका…औरऔर भी