अमीर का अमीर और गरीब का गरीब होते जाना समाज के लिए अच्छा नहीं। लेकिन अपने यहां शेयर बाज़ार तक में यही हो रहा है। 1 जनवरी 2018 से 8 फरवरी 2019 तक बीएसई सेंसेक्स 8.08% बढ़ा है, जबकि मिडकैप सूचकांक 18.52% और स्मॉलकैप सूचकांक 28.53% गिरा है। बड़ों को पुचकारना और छोटों को दुत्कारना अच्छा नहीं। हालांकि इससे छोटी मजबूत कंपनियों को पकड़ने का अच्छा मौका मिल गया है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

नकारात्मक खबर घबराहट पैदा कर दे तो शेयरों के भाव गोता लगा जाते हैं। कुछ महीने पहले यस बैंक के साथ यह हादसा हुआ था। हालांकि अब वह उससे उबरने लगा है। खबरों की ऐसी मार के वक्त अगर यकीन हो कि कंपनी की मूलभूत मजबूती बरकरार है और उसके धंधे का भविष्य संभावनामय है तो उसके डुबकी लगाते शेयर को लपकने का रिस्क लिया जा सकता है। आज तथास्तु में झटका खानेवाली ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

धरती, जल, अग्नि व वायु को सदियों से हर जीवधारी के शरीर का आवश्यक अवयव माना गया है। इसी तरह किसी भी देश के लिए रणनीतिक महत्व के कुछ उद्योग होते हैं जो अनिवार्य रूप से हमेशा के लिए उससे जुड़े रहते हैं। इनकी उपयोगिता एफएमसीजी य दवा उद्योग से भी ज्यादा होती है। ऐसे उद्योग में सक्रिय प्रमुख कंपनियां लंबे निवेश के लिए बड़ी माफिक होती है। आज तथास्तु में ऐसे ही उद्योग की अहम कंपनी…औरऔर भी

किसी अन्य व्यापार की तरह शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग भी एक बिजनेस है। उसका सारा जोखिम हमें खुद उठाना पड़ता है। उस पर टैक्स भी बिजनेस जैसा लगता है। वहीं, लंबे समय के निवेश में हम खुद बिजनेस नहीं करते, बल्कि दूसरों द्वारा किए जा रहे संभावनामय बिजनेस पर दांव लगाते हैं। उसके मालिकाने का अंश खरीदकर रख लेते हैं। कितने साल तक, यह हमारे लक्ष्य पर निर्भर है। अब तथास्तु में जमे-जमाए बिजनेस वाली एक कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों की कमी नहीं है। आम तौर पर नाम व काम के दम पर उनके शेयर काफी महंगे होते हैं। लेकिन कभी-कभी खराब आर्थिक हालात या कंपनी के कामकाज में तात्कालिक समस्याओं से उपजी निराशा के चलते उनके शेयर गिरकर ज़मीन पर आ जाते हैं। ऐसे वक्त में इन कंपनियों के शेयर खरीद लेने में समझदारी हैं क्योंकि उनका दीर्घकालिक भविष्य मजबूत बना रहता है। आज तथास्तु में ऐसे ही एक ब्लूचिप कंपनी…औरऔर भी

समाज है तो बाज़ार है। बाज़ार है तो हर वस्तु या सेवा का मूल्य है। आमतौर पर बाज़ार में किसी सेवा या वस्तु का मूल्य ठीक उस समय उसकी मांग व सप्लाई के संतुलन को सटीक रूप से दिखलाता है। लेकिन शेयर बाज़ार में असली मूल्य अमूमन वर्तमान भावों में नहीं झलकता क्योंकि वे भविष्य के आकलन और कंपनी को लेकर बनी तात्कालिक धारणा को दर्शाते हैं। तथास्तु में आज ऐसे ही भाव-जाल में फंसी एक कंपनी…औरऔर भी

पुराना साल गया। नए साल में लालच के छल्ले फेंकने का दौर चालू है। ब्रोकर दस-बीस स्टॉक उछालकर उनमें साल भर में 20-30% कमाई का दावा कर रहे हैं। लेकिन गौर करें तो ये सभी स्टॉक्स पहले से काफी बढ़ चुके हैं। यह है आम दृष्टि के दोहन का फॉर्मूला क्योंकि लोगबाग चढ़े-बढ़े हुए के पीछे ही भागते हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में निवेश से कमाई खास दृष्टि से होती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार में बहुत शोर है। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ते पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक देश से भागते रहे तो क्या होगा? लोकसभा चुनावों में मोदी का जादू नहीं चला तो! शेयर बाज़ार मंदी की गिरफ्त में आ गया तो! लेकिन इस सारे शोर और सवालों के बीच हमारे जीवन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ने जा रहा। इसी तरह कुछ ऐसी कंपनियां हैं जिन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

बचपन, जवानी, बुढ़ापा और मौत। जीवन के इस चक्र में इंसान सबसे ज्यादा मूल्यवान अपनी जवानी में होता है। तमाम कंपनियां भी ऐसे ही चक्र से गुजरती हैं। लेकिन कुछ कंपनियां वक्त की नब्ज़ और ज़रूरत से ऐसी जुड़ती हैं कि बहुत लंबा जीवन जीती हैं। सालों-साल बाद भी वे एकदम जवान रहती हैं। ऐसी कंपनियों को अगर हम वक्त रहते पकड़ लें तो हमारी बचत को पंख लग जाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार पर मुठ्ठीभर कंपनियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। बाज़ार के कुल कारोबार में शीर्ष 50 कंपनियो का हिस्सा बढ़कर 58% हो चुका है। वहीं, शीर्ष की 100 कंपनियों की बात करें तो उनका हिस्सा 75% हो चुका है। साल भर पहले तक स्थिति इतनी विषम नहीं थी। आज अच्छी-खासी मजबूत छोटी कंपनियों तक का कोई पुछत्तर नहीं है। इसलिए बाज़ार बढ़ने के बावजूद उनके शेयर गिर रहे हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी