युद्ध की विभीषिका हो या महामारी की मार, इंसान की अदम्य जिजीविसा हर हाल में उद्यमशीलता के मौके तलाश ही लेती है। मसलन, भारत पर कोरोना के कसते शिकंज़े और लॉकडाउन के बीच व्यक्ति-व्यक्ति के भौतिक फासले बढ़ गए हैं। ऐसे में अपडेट रहने के लिए डेटा की मांग बढ़ गई है। डिजिटल पेमेंट का भी चलन बढ़ गया है। कुछ और भी उद्योगों को नया आवेग मिला है। तथास्तु में ऐसे ही एक उद्योग की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में धोखे व फ्रॉड का खेल चलता रहता है। इसका गुब्बारा फुलाने के पीछे किसी न किसी ताकतवर खिलाड़ी/संस्था का हाथ रहता है। ऐसे कई किस्से वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक बिखरे पड़े हैं। इसलिए हमारे लिए सबसे अच्छी रणनीति यह है कि बाज़ार के उन्माद का शिकार होने के बजाय शांत भाव से अच्छा धंधा कर रही संभावनामय कंपनियों में 5-10 साल के लिए निवेश करे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

देश के राजनीतिक व सामाजिक ही नहीं, वित्तीय जीवन में भी ठगों की भरमार है। बताइए, कोई जानी-मानी इक्विटी रिसर्च फर्म प्रतिमाह एक कंपनी बताने के 6000 रुपए सालाना लेने के बावजूद ऐसी कंपनी सुझाए जिसका शेयर अभी 193 रुपए पर हो और तीन साल में 200 रुपए तक पहुंचने का लक्ष्य रखे तो आप क्या कहेंगे! फर्म कहती है कि इसमें निवेश 130 रुपए तक गिरने पर करें। क्या मतलब है इसका? अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था का हाल पूरी तरह इस पर निर्भर है कि हम कोरोना की जकड़ से निकलकर सामान्य स्थिति में कब आते हैं। हालात सामान्य हो गए तब भी मजदूरों के फैक्ट्रियों में वापस लौटने से लेकर देश की 138 करोड़ आबादी तक वैक्सीन पहुंचाने जैसे काम आसान नहीं। इधर दुनिया का हर देश अपनी अर्थव्यवस्था बचाने में लगा है तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा हमारी मजबूरी है। इस मजबूरी के बीच एक मजबूत कंपनी…औरऔर भी

भारत ने कोरोना के नए मामलों में दुनिया के तमाम देशों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले 24 घंटे में यहां 63,489 नए मामले आए हैं। हालांकि अमेरिका समेत अन्य बड़े देशों में कोरोना का कहर फिलहाल उतार पर है। वैसे भी कोरोना रहे या जाए, कुछ ऐसे बिजनेस और कंपनियां हैं जो आर्थिक जीवन के लिए अपरिहार्य हैं। कंपनी सरकारी हो या निजी, इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो खेत बेचारा क्या करे! इस समय जनता के टैक्स और बड़ी मेहनत व महत्वाकांक्षा से बनाई गई सरकारी कंपनियों का यही हाल हो गया है। मोदी सरकार ने ओएनजीसी जैसी मजबूत कंपनियों को खोखला बना दिया, बीपीसीएल जैसी कंपनियां बेच रही है, जबकि स्टील अथॉरिटी जैसी बहुतेरी कंपनियों का हाल बेहाल कर दिया। फिर भी कुछ सरकारी कंपनियों अब भी मजबूत हैं। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

आनेवाले हफ्ते और महीने भारतीय शेयर बाज़ार के लिए बड़े उथल-पुथल भरे हो सकते हैं। प्रधानमंत्री दावा करते रहें कि सही समय पर सही फैसले लेने से हम कोरोना के मामले में संभले हुए हैं। लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों से भारत दुनिया में अमेरिका व ब्राज़ील के बाद तीसरे नंबर पर है तो इसे संभलना कैसे कह सकते हैं! कहीं बाज़ार को कोरोना का दूसरा ज़ोरदार झटका लग गया तो! अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अमूमन छोटी कंपनियों के शेयर उछलते और बड़ी कंपनियों के शेयर मध्यम चाल से चलते हैं। दिसंबर 2017 में निफ्टी स्मॉलकैप-50 सूचकांक 57 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था तो निफ्टी-50 सूचकांक 26 पर। लेकिन इधर यह रीत उलट गई। महीने भर पहले निफ्टी-50 सूचकांक 26.32 के पी/ई पर था तो स्मॉलकैप-50 कहीं नीचे 17.83 पर। शुक्रवार को ये सूचकांक क्रमशः 29.35 और 20.22 के पी/ई पर ट्रेड हुए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

कहते हैं, शेयर बाज़ार को कोई पकड़ नहीं सकता। पर उसका स्वभाव तो वहां सक्रिय इंसानों की हरकत से ही बनता है। इंसान लालच व डर की भावना और इनसे जुड़े एड्रेनलीन और कोर्टिज़ोल हॉर्मोन का वशीभूत होकर बाज़ार में उतरता है। तुरत-फुरत में ये भावनाएं और हॉर्मोन इंसान का माथा घुमा देते हैं। लेकिन लंबे समय में उसका दिमाग ठिकाने आ जाता है। शेयर बाज़ार का भी यही बर्ताव है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

लालच व डर की भावनाएं ही शेयर बाज़ार को चलाती हैं। मार्च में कोरोना का प्रकोप बढ़ा। देश में लॉकडाउन का सिलसिला शुरू हुआ। बाज़ार इतना गिरा कि बढ़ने का लालच बढ़ गया। इसमें फंसकर लॉकडाउन के दौरान 12 लाख से ज्यादा नए निवेशकों ने डिमैट खाते खुलवा डाले। फिर, डर बढ़ने लगा तो जून में इक्विटी म्यूचुअल फंडों में आया शुद्ध निवेश मई की अपेक्षा 95% से ज्यादा घट गया। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी