रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के मसले ने बाजार को भारी आवेग दिया। इसके चक्कर में ट्रेडर ऊंचे भावों पर भारी-भरकम खरीद के सौदे कर बैठे। इसका नतीजा यह हुआ कि बाजार खुद को ऊंचे स्तर पर टिकाए नहीं रख सका। बीएसई सेंसेक्स दिन में 263.12 अंक बढ़ गया था, लेकिन बंद हुआ केवल 23.94 अंक की बढ़त के साथ। दोनों अंबानी भाइयों की कंपनियों के शेयर कारोबारियों के पसंदीदा बने रहे। आरआईएल 1049 तक उठने के बाद 2.58औरऔर भी

समय रहते कदम उठाना जरूरी होता है। सांप के गुजर जाने के बाद लाठी पीटने में क्या फायदा। आग बुझ गई तब फायर ब्रिगेड का क्या काम। मानसून बीत जाने के बाद बाढ़ का पानी मांगने का क्या तुक। मरीज की हालत जब नाजुक हो तभी उसे तुरंत इलाज चाहिए होता है। इसी तरह जब सेल खत्म हो जाए तो आप 30 फीसदी के भारी डिस्काउंट की मांग नहीं सकते। डर का कोई अंत नहीं है। आपकोऔरऔर भी

मैंने आपसे बोला था कि ओएनजीसी एक ही सत्र में 100 रुपए बढ़ जाएगा और प्राकृतिक गैस के मूल्य (एपीएम) पर सरकार के फैसले ने ऐसा कर दिखाया। ओएनजीसी का शेयर बीएसई में 112.50 रुपए तक बढ़ गया। हालांकि बंद हुआ 89.70 रुपए बढ़कर 1118.20 रुपए पर। बढ़ती अनिश्चितता के बीच भी निवेशक बने रहना बहादुरी का काम है। असल में समझदार लोगों को ऐसे दौर में खरीद करनी और बढ़ानी चाहिए। दिक्कत है कि शेयर बाजारऔरऔर भी

अमेरिका में कंपनियों के नतीजे आने का दौर बीत गया और एस एंड पी इंडेक्स में शामिल कंपनियों की आय 17 फीसदी बढ़ी है, जबकि उम्मीद 14 फीसदी की ही थी। वहां बेरोजगारी की दर घटना शुरू हो गई है और हाउसिंग क्षेत्र में मांग बढ़ रही है। इस तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था उठान पर है और ग्रीस का संकट अमेरिका को आगे बढ़ने में मददगार होगा। भारतीय कंपनियों की भी आय अभी तक उम्मीद से बेहतर रहीऔरऔर भी

जब भी कभी बाजार गिरता है और हर तरफ से बेचो-बेचो की पुकार आने लगती है तब मैं बाजार के बर्ताव और निवेशकों व ट्रेडरों के मनोविज्ञान पर मुस्कुराने लगता हूं। ऐसा लेहमान ब्रदर्स के दीवालिया होने की खबर के बाद भी हुआ था, जब बाजार में जबरदस्त बिकवाली चली थी। असल में आप इसी तरह हवा में बहकर बाजार को नीचे-नीचे पहुंचा देते हैं और दूसरों को अपने ऊपर सवारी गांठने का मौका दे देते हैं।औरऔर भी

बाजार की दिशा का अनुमान लगाने में हम ज्यादा गलत नहीं थे। हां, शुक्रवार को हम गलत निकले क्योंकि वैश्विक बाजारों का असर हावी हो गया। लेकिन सोमवार के रुझान के लिए वैश्विक कमजोरी को वजह बताने का क्या तुक है? जैसा मैं हमेशा से मानता रहा हूं कि जब बाजार अपनी तलहटी पर होता है तभी चार्ट के धंधे और टेक्निकल सलाह वाले लोग बिक्री की सलाह दे डालते हैं। और, फिर वैश्विक बाजारों के असरऔरऔर भी

जेनबर्क्ट फार्मास्यूटिकल्स का शेयर शुक्रवार को 71.75 रुपए तक जाकर 52 हफ्तों के शिखर पर पहुंच गया। लेकिन बंद हुआ तो गुरुवार के बंद भाव 68.30 रुपए से 4.69 फीसदी गिरकर 65.10 रुपए पर। यह कंपनी केवल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है। इसका शेयर बी ग्रुप में है और इसका अंकित मूल्य 10 रुपए है। पिछली चार तिमाहियों के वित्तीय परिणामों के आधार पर इसका टीटीएम (ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ) ईपीएस 7.51 रुपए है। इस तरह मौजूदाऔरऔर भी

मानसून की हालत पर मौसम विभाग का बयान, यूबीएस बैंक द्वारा कमोडिटी को डाउनग्रेड किया जाना, कमजोर यूरो और इसके ऊपर से शुक्रवार से निजात पाने की मानसिकता। ऐसी ही तमाम बातें निवेशकों के दिमाग पर हावी रहीं। शहर में एक तरह का डर छाया हुआ है। दलाल पथ में भी भरोसा एकदम निचले पायदान पर पहुंच चुका है। ज्यादातर ट्रेडर और निवेशक पहले ही बाजार से बाहर जा चुके हैं। आज तो एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुल्स)औरऔर भी

मेरा आपको सुझाव है कि कुछ समय निकालें और कंपनी व बाजार के बारे में उपलब्ध कराई जा रही रिसर्च का अध्ययन करें। जैसे, आज हम इस कॉलम के अंत में कावेरी टेलिकॉम की रिसर्च रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। हम इस तरह की विशेष जानकारियां उपलब्ध कराते रहते हैं। इनके अध्ययन से भारत के साथ-साथ दुनिया के बाजारों के बर्ताव को लेकर आपके जो भ्रम हैं, उनमें से ज्यादातर दूर हो सकते हैं। अगर फिर भीऔरऔर भी

मैं लगातार इस बात पर कायम हूं कि भारत सचमुच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए जबरदस्त आकर्षण का स्रोत बना हुआ है। यूरोप के ऋण संकट ने विदेशी पूंजी के प्रवाह को भारत की तरफ मोड़ा है। यह बात पिछले कुछ दिनों में वित्त मंत्रालय के आला अधिकारी भी स्वीकार कर चुके हैं। जिस तरह कल भारतीय रिजर्व बैंक ने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की शर्तों में ढील दी और गवर्नर डी सुब्बारावऔरऔर भी