औषधि मूल्‍य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 1995 के अनुसार अनु‍सूचित दवाओं का मूल्य राष्‍ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) खुदरा दुकानदारों के 16 फीसदी लाभ को ध्‍यान में रखते हुए तय करता है। इनमें 74 बल्‍क दवाएं शामिल हैं। कोई भी व्‍यक्ति किसी भी अनुसूचित दवा को तय मूल्य से ज्यादा दाम पर नहीं बेच सकता। डीपीसीओ 1995 के अंतर्गत ब्रांड और बिना ब्रांड वाली दवाओं में कोई अंतर नहीं किया जाता। जो गैर-अनुसूचित दवाएं इस आदेश सेऔरऔर भी

भारत साल 2029 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन सकता है। यह मानना है एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) से संबंद्ध इकनॉमिक्‍स एंड प्रोग्राम डेवलेपमेंट के निदेशक डॉ. रफैल ऐशवर्न का। उन्होंने गुरुवार को हैदराबाद में भारतीय विमानन 2012 सम्‍मेलन के दूसरे दिन यह बात कही। डॉ. ऐशवर्न ने पिछले पांच सालों के दौरान भारत में विमानन के क्षेत्र में विकास पर मुख्‍य रूप से चर्चा की। इस दौरान भारत हवाई अड्डों के रखरखाव, भीड़औरऔर भी

घटती विकास दर की हकीकत और आगे बढ़ जाने की उम्मीद के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देश का 81वां आम बजट शुक्रवार को संसद में पेश कर रहे हैं। आम नौकरीपेशा लोगों को उम्मीद है कि आयकर छूट की सीमा 1.80 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए की जा सकती है तो कॉरपोरेट क्षेत्र को लगता है कि एक्साइज ड्यूटी को 10 से 12 करके उनको पहले दी गई राहत वापस ले ली जाएगी। वहीं अर्थशास्त्रीऔरऔर भी

15 मार्च 2012, चालू वित्त वर्ष 2011-12 की अंतिम तिमाही में एडवांस टैक्स की आखिरी किश्त देने की आखिरी तारीख। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) तो कई दिन बाद पूरे आंकड़े जारी करता है। लेकिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से मिले शुरुआती संकेतों से पता चला है कि कॉरपोरेट क्षेत्र में ज्यादा टैक्स नहीं भरा है। जिन्होंने दिया है, उनमें बैंकिंग व बीमा कंपनियां सबसे आगे हैं। देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)औरऔर भी

रीयल एस्टेट अर्थव्यवस्था का बड़ा ही बदनाम क्षेत्र बना हुआ है। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि सबसे ज्यादा काला धन रीयल एस्टेट के धंधे में लगा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस कालिख को साफ करने के लिए वित्त मंत्री बजट 2012-13 में रीयल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने का ऐलान कर सकते हैं। रीयल एस्टेट में लगे लोगों का मानना है कि उद्योग का दर्जा न मिलना इस धंधेऔरऔर भी

दिल्ली के राजनीतिक हलकों में भले ही हड़बड़ी मची हो, लेकिन रिजर्व बैंक को फिलहाल कोई हड़बड़ी नहीं है। उसने मौद्रिक नीति की मध्य-तिमाही समीक्षा में कुछ भी नहीं बदला। सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) को पिछले ही हफ्ते उसने 5.5 फीसदी से घटाकर 4.75 फीसदी किया था तो उसे घटाने की गुंजाइश थी नहीं। ब्याज दर या रेपो दर में जरूर 0.25 फीसदी कमी की उम्मीद थी। बहुतेरे विश्लेषक मान रहे थे कि इसे 8.50 फीसदी सेऔरऔर भी

राष्‍ट्रीय ई-शासन योजना के अंतर्गत सरकार ने सामान्‍य सेवा केन्‍द्र (सीएससी) योजना को मंजूरी दे दी है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल्दी ही एक लाख कियोस्‍क या साइबर कैफे स्‍थापित कर लिए जाएंगे। संचार व सूचना प्रौद्योगिकी राज्‍यमंत्री सचिन पायलट ने बुधवार को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत औसतन छह गांवों के लिए एक कियोस्‍क स्‍थापित किया जाना है। ये केन्‍द्र इंटरनेट और ई-मेल की सुविधाओं सहित सार्वजनिक सेवाएंऔरऔर भी

रुपयों के खेल में चंद पैसों का कोई मायने नहीं होता। शायद रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट 2012-13 में इसी आम मनोविज्ञान को कुशल मार्केटिंग के अंदाज में इस्तेमाल करने की कोशिश की। उन्होंने पहले तो रेलवे की खस्ता माली हालत का रोना रोया। कहा, “कंधे झुक गए हैं, कमर लचक गई है। बोझा उठा-उठाकर बेचारी रेल थक गई है। रेलगाड़ी को नई दवा, नया असर चाहिए। इस सफर में मुझे आप-सा हमसफर चाहिए।” इसकेऔरऔर भी

लगता है कि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक की परीक्षा ले रही है। सरकार की तरफ से बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में सकल मुद्रास्फीति की दर पिछले पांच महीनों से घटते-घटते अचानक बढ़ गई। जनवरी में इसकी दर 26 महीनों के न्यूनतम स्तर 6.55 फीसदी पर पहुंच गई थी। लेकिन फरवरी में बढ़कर 6.95 फीसदी पर पहुंचा गई। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि चालू मार्च में यह 6.50 फीसदी पर आऔरऔर भी