राजीव गांधी के नाम पर सीधे शेयरों में 50,000 रुपए लगाओ। तीन साल तक उसे हाथ न लगाओ और इस निवेश का 50 फीसदी हिस्सा आयकर में रियायत पाओ। जी हां, वित्त मंत्री ने नए साल के बजट में रिटेल निवेशकों को शेयर बाजार में खींचने के लिए पहली बार राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू की है। इसका पूरा ब्योरा तो बाद में अलग से जारी किया जाएगा। लेकिन वित्त मंत्री के प्रस्ताव के मुताबिक, जिनऔरऔर भी

घटती विकास दर की हकीकत और आगे बढ़ जाने की उम्मीद के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देश का 81वां आम बजट शुक्रवार को संसद में पेश कर रहे हैं। आम नौकरीपेशा लोगों को उम्मीद है कि आयकर छूट की सीमा 1.80 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए की जा सकती है तो कॉरपोरेट क्षेत्र को लगता है कि एक्साइज ड्यूटी को 10 से 12 करके उनको पहले दी गई राहत वापस ले ली जाएगी। वहीं अर्थशास्त्रीऔरऔर भी

रीयल एस्टेट अर्थव्यवस्था का बड़ा ही बदनाम क्षेत्र बना हुआ है। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि सबसे ज्यादा काला धन रीयल एस्टेट के धंधे में लगा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस कालिख को साफ करने के लिए वित्त मंत्री बजट 2012-13 में रीयल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने का ऐलान कर सकते हैं। रीयल एस्टेट में लगे लोगों का मानना है कि उद्योग का दर्जा न मिलना इस धंधेऔरऔर भी

रुपयों के खेल में चंद पैसों का कोई मायने नहीं होता। शायद रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट 2012-13 में इसी आम मनोविज्ञान को कुशल मार्केटिंग के अंदाज में इस्तेमाल करने की कोशिश की। उन्होंने पहले तो रेलवे की खस्ता माली हालत का रोना रोया। कहा, “कंधे झुक गए हैं, कमर लचक गई है। बोझा उठा-उठाकर बेचारी रेल थक गई है। रेलगाड़ी को नई दवा, नया असर चाहिए। इस सफर में मुझे आप-सा हमसफर चाहिए।” इसकेऔरऔर भी

अगर कुछ ठोस उपाय नहीं किए गए तो भारतीय रेल की माली हालत ध्वस्त होने की कगार है। करीब महीने भर पहले 17 फरवरी को परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन अनिल काकोदकर की अध्यक्षता में बने विशेषज्ञ दल ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही थी। उसका कहना था कि भारतीय रेल को सुरक्षित यात्रा के मानकों को पूरा करने के लिए करीब एक लाख करोड़ रुपए लगाने होंगे। इसके दस दिन बाद 27 फरवरी को राष्ट्रीयऔरऔर भी

भारतीय रेल के पास दुनिया में अमेरिका, रूस व चीन के बाद चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है। उसका जाल 65,000 किलोमीटर लम्बाई में फैला है जिस पर उसने 1,14,500 किलोमीटर पटरियां बिछा रखी हैं। वह लगभग 10,500 ट्रेनें चलाती है जिनसे हर दिन करीब तीन करोड़ यात्री सफर करते हैं और 28 लाख टन माल आता-जाता है। रेलवे की आय का करीब 70 फीसदी हिस्सा मालभाड़े से आता है। बाकी 30 फीसदी में यात्री किराए से लेकरऔरऔर भी

बजट में एक ऐसी घोषणा है जिसे करने के लिए सरकार के खजाने से कुछ नहीं जाता। इसके लिए वित्त मंत्री को बस अपनी छटांक भर की जुबान चलानी पड़ती है। यह है कृषि ऋण के लक्ष्य में बढ़ोतरी। पूरी उम्मीद है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी अगले हफ्ते शुक्रवार, 16 मार्च को 2012-13 का बजट पेश करते वक्त कृषि ऋण का लक्ष्य 25 फीसदी बढ़ा देंगे। चालू वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण का बजट लक्ष्यऔरऔर भी

अभी रेल बजट आने में पूरे एक हफ्ते बचे हैं। नए वित्त वर्ष 2012-13 का रेल बजट 14 मार्च को पेश किया जाना है। लेकिन रेल मंत्रालय ने तमाम जिंसों का मालभाड़ा अभी से 20 फीसदी तक बढ़ा दिया है। यह वृद्धि मंगलवार को गुपचुप कर दी गई। किसी तरह की तोहमत से बचने के लिए रेल मंत्रालय ने इसे मालभाड़ा को बढ़ाने के बजाय तर्कसंगत बनाने का नाम दिया है। इसके तहत असल में मालभाड़े कीऔरऔर भी

केंद्र सरकार सार्वजनिक ऋण के प्रबंधन के लिए रिजर्व बैक से अलग व्यवस्था करेगी। इसके लिए ऋण प्रबंधन कार्यालय (डीएमओ) बनाया जाएगा जिसके लिए एक विधेयक संसद के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। बजट सत्र अगले हफ्ते सोमवार, 12 मार्च से शुरू हो रहा है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को सरकारी ऋण की ताजा स्थिति पर जारी रिपोर्ट में कहा है, “सार्वजनिक ऋण प्रबंधन के बारे में सबसे अहम सुधार है वित्त मंत्रालय में अलग सेऔरऔर भी