नए साल के बजट में तमाम टैक्सों में घटबढ़ हो सकती है। टैक्स का आधार बढ़ाने की कोशिश भी हो सकती है। लेकिन एक बात तय है कि वित्त मंत्री पलनियप्पन चिदंबरम किसानों या कृषि आय पर कोई टैक्स नहीं लगाएंगे। वैसे, बीजेपी की तरफ से अगर यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री बने होते तो वे भी यह जोखिम नहीं उठाते। फिर भी टैक्स आधार बढ़ाने की बड़ी-बड़ी बातों से कोई भी वित्त मंत्री बाज़ नहीं आता। दिक्कतऔरऔर भी

मार्च में खत्म हो रहे वित्त वर्ष 2012-13 के आम बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य व प्रसारण जैसी सामाजिक सेवाओं पर 20,784 करोड़ रुपए के खर्च का प्रावधान है। यह देश की 121 करोड़ से ज्यादा आबादी के लिए है। वहीं, केंद्र सरकार राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री जैसे मुठ्ठी भर वीवीआईपी लोगों के लिए 12 हेलिकॉप्टर खरीदने का फैसला करती है, जिसकी लागत 3600 करोड़ रुपए है। यह रकम सामाजिक सेवाओं के व्यय की 17.32% बैठती है। भले हीऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। उम्मीद थी कि बीते वित्त वर्ष 2011-12 की आखिरी तिमाही में अर्थव्यवस्था या जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर 6.1 फीसदी रहेगी। लेकिन केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश का जीडीपी जनवरी-मार्च 2012 के दौरान मात्र 5.3 फीसदी बढ़ा है। इसे मिलाकर पूरे वित्त वर्ष 2011-12 की आर्थिक विकास दर 6.5 फीसदी पर आ गई है, जबकि फरवरी में इसका अग्रिम अनुमानऔरऔर भी

जिस सरकार को आमतौर पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आम आदमी के मानवाधिकारों की खास फिक्र नहीं रहती, उसे विदेश में काला धन रखनेवाले खास भारतीयों के मानवाधिकारों के उल्लंघन की भारी चिंता सता रही है। सोमवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से कालेधन पर संसद में पेश श्वेतपत्र में कहा गया है कि सरकार ने दुनिया के जिन देशों के साथ दोहरा कराधान बचाव करार (डीटीएए) या कर सूचना विनिमय करार (टीआईईए) कर रखे हैं,औरऔर भी

सरकार ने सेवा और केन्द्रीय उत्पाद शुल्क पर समान कर संहिता की संभाव्यता का पता लगाने के वास्ते एम के गुप्ता की अध्यक्षता में एक अध्ययन दल का गठन किया है। यह कदम इस साल के बजट भाषण में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप उठाया गया है। अध्ययन दल दो कानूनों को सुसंगत बनाने के सुझाव देगा। मालूम हो कि एम के गुप्ता भारतीय राजस्व सेवा के सेवानिवृत अधिकारी है और सीमाऔरऔर भी

सरकार उन्नीस दिनों से चल रही सर्राफा व्यापारियों की देशव्यापी हड़ताल के आगे झुकती नजर आ रही है। उसने बुधवार को घोषित किया कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी शुक्रवार, 6 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रमुख शहरों के आभूषण निर्माताओं के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। संबंधित संस्‍थाओं से इस बैठक के लिए अपने दो प्रतिनिधियों को मनोनीत करने को कहा गया है। संकेत इस बात का है कि अनब्रांडेड आभूषणों पर लगाई गई एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी वापसऔरऔर भी

नए साल के बजट प्रस्तावों पर सारी दुनिया में बेचैनी मची हुई है। दुनिया की ऐसी ढाई लाख से ज्यादा कंपनियों के प्रतिनिधि उद्योग व व्यापार संगठनों ने सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर बजट प्रस्तावों पर अपना ऐतराज जताया है। उन्होंने यह पत्र 29 मार्च को लिखा है। अंतरराष्ट्रीय जगत की कुछ ऐसी ही शिकायतों को लेकर ब्रिटेन के वित्त मंत्री जॉर्ज ओसबोर्न भी सोमवार को भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मिले।औरऔर भी

अभी तक केंद्र सरकार 119 सेवाओं पर टैक्स लगाती थी। लेकिन चालू वित्त वर्ष 2012-13 से सरकार ने 17 सेवाओं की ऐसी निषेध सूची बना दी है जिसके बाहर आनेवाली सभी सेवाओं पर टैक्स लगाया जाएगा। इस निषेध सूची में जुआ, सट्टा और लॉटरी भी शामिल है। यानी, इस पर कोई सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही रेडियो या टेलिविजन प्रसारण पर दिए गए विज्ञापनों के अलावा अन्य माध्यमों के विज्ञापनों को भी सर्विस टैक्स से मुक्तऔरऔर भी

देश भर में 17 मार्च से शुरू सर्राफा व्यापारियों की हड़ताल बुधवार को बारहवें दिन भी जारी  रही। इसकी धमक संसद में भी सुनाई पड़ी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जबाव देते हुए संकेत दिया कि वे अनब्रांडेड आभूषणों पर उत्पाद शुल्क वापस ले सकते हैं। लेकिन सोने पर बढ़ा हुआ आयात शुल्क वापस लेने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि सोने पर बढ़े हुए आयातऔरऔर भी

देश में सबसे ज्यादा ऋण के बोझ तले दबा राज्य महाराष्ट्र है। रिजर्व बैंक के मुताबिक बीते साल 2010-11 में महाराष्ट्र के ऊपर 2.36 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इससे ठीक पीछे उत्तर प्रदेश है जिस पर कुल 2.34 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। फिर क्रम से पश्चिम बंगाल (1.98 लाख करोड़), गुजरात व आंध्र प्रदेश (1.36 लाख करोड़) और तमिलनाडु (1.09 लाख करोड़ रुपए) का नंबर आता है। राज्य के नए बजट अनुमान केऔरऔर भी