वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी संभवतः अगले हफ्ते बुधवार, 18 अगस्त को माल व सेवा कर (जीएसटी) के लिए तैयार किए जा रहे संविधान संशोधन के नए मसौदे पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकारप्राप्त समिति के साथ बैठक करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया कि संशोधित मसौदे में जीएसटी परिषद का ढांचा बदल दिया जाएगा। पिछले मसौदे को देखने के बाद राज्यों ने आपत्ति जताई दी थी कि इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री को कराधान केऔरऔर भी

भारतीय रेल के पास 10.65 लाख एकड़ जमीन है। इसका 90 फीसदी हिस्सा रेल महकमा खुद के कामकाज में इस्तेमाल करता है। उसकी बाकी 1.13 लाख एकड़ जमीन खाली पड़ी है। रेलवे का कहना है कि इस जमीन का प्राथमिक इस्तेमाल गेज बदलने, फ्रेट कॉरिडोर बनाने व ट्रैक की सर्विसिंग जैसे कामों में किया जाएगा। इससे बची इफरात जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा। इसके लिए बाकायदा साल 2005 में रेल भूमि विकास प्राधिकरण बनाया गया है। वहऔरऔर भी

एक तरफ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी बुधवार को लोकसभा में पक्ष-विपक्ष के सांसदों को समझा रहे थे कि जीएसटी (माल व सेवा कर) के आने से किस तरह पेट्रोलियम पर ज्यादा कराधान से लेकर आम आदमी को परेशान कर रही महंगाई तक की समस्या हल हो जाएगी, वहीं दूसरी तरफ राजधानी में ही राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकारप्राप्त समिति ने अपनी बैठक के बाद जीएसटी से जुडे संविधान संशोधन विधेयक के मौजूदा प्रारूप को खारिज करऔरऔर भी

कृषि, खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को संसद में ऐसा बयान दिया जिससे लगता है कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चहेते खाद्य सुरक्षा विधेयक को कानून बना दिया गया तो देश राजकोषीय घाटे के दलदल में घंस जाएगा। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत अगर गरीब परिवारों को महीने में 25 किलो अनाज दिया जाता है तो सरकार को 76720 करोड़औरऔर भी

देश में 1 अप्रैल 2011 से लागू होने जा रही माल व सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में केंद्र सरकार पहले साल टैक्स की रियायती दर 6 फीसदी रखेगी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकारसंपन्न समिति की बैठक में यह बात कही। उनका कहना था कि 2011-12 में केंद्रीय जीएसटी की दर माल के लिए 6 फीसदी और मानक दर 10 फीसदी रहेगी। सेवाओं पर यह टैक्स 8औरऔर भी

केंद्र सरकार ने 20 प्रोफेशनल लोगों का एक पैनल बनाया है जो विभिन्न मंत्रालयों को अपना सालाना लक्ष्य पूरा करने में मदद करेगा। ये प्रोफेशनल कॉरपोरेट क्षेत्र से लिये गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं – गोदरेज इंडस्ट्रीज के पूर्व निदेशक विस्टी बानाजी, बोस्टन कंसल्टिंग के विक्रम भल्ला और प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स के अमृत पांडुरंगी। खास बात यह है कि जो भी मंत्रालय इन विशेषज्ञों की सेवा लेगा, वह इन्हें हर दिन के लिए 10,000औरऔर भी

वित्त वर्ष 2010-11 का बजट आज लोकसभा में पास हो गया। लेकिन इससे पहले सरकार ने कॉफी किसानों को कर्ज में राहत, रुई व आयरन ओर निर्यात को महंगा करने, स्टेनलेस स्टील उद्योग को राहत, नए अस्पताओं को कर रियायत और रीयल्टी व कंस्ट्रक्शन उद्योग में सेवा कर में थोड़ी छूट देने का ऐलान कर दिया। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्त विधेयक में नए संशोधनों का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया। लेकिनऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण के अंत में कहा है कि यह बजट आम आदमी का है। यह किसानों, कृषकों, उद्यमियों और निवेशकों का है। इसमें बाकी सब तो ठीक है, लेकिन किसान और कृषक का फर्क समझ में नहीं आया। असल में वित्त मंत्री ने अपने मूल अंग्रेजी भाषण में फार्मर और एग्रीकल्चरिस्ट शब्द का इस्तेमाल किया है। लेकिन वित्त मंत्रालय के अनुवादक बाबुओं ने शब्दकोष देखा होगा तो दोनों ही शब्दों काऔरऔर भी

जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, वित्त मंत्री ने बजट 2010-11 में वह काम कर दिखाया। सभी को यही लग रहा था कि क्योंकि प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड) लागू होनी है, इसलिए शायद प्रणब मुखर्जी इस बार व्यक्तिगत आयकर की दरों या स्लैब में कोई तब्दीली नहीं करेंगे। बहुत हुआ तो करमुक्त आय के लिए होम लोन के ब्याज की सीमा को 1.5 लाख रुपए के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर देंगे।औरऔर भी

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने अपने बजट भाषण में ज़ोर देकर कहा कि हम रेलों का निजीकरण नहीं करने जा रहे हैं और यह एक सरकारी संगठन बना रहेगा। लेकिन पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) पर बनी रेलवे की समिति के अध्यक्ष अमित मित्रा के नेतृत्ववाले उद्योग संगठन फिक्की का कहना है, “रेल बजट का मुख्य ज़ोर रेलों को निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर है ताकि विकास को तेज किया जा सके और अर्थव्यवस्था के 9-10 फीसदीऔरऔर भी