अपरंपार सुख
किसी गिरते बूढ़े को उठाकर तो देखो! सड़क पर गिरे पड़े किसी घायल को अस्पताल पहुंचाकर तो देखो! घर से भागे किसी बच्चे को आसरा देकर तो देखो! जानवर से उठकर कभी इंसान बनकर तो देखो!और भीऔर भी
मुठ्ठी में मंज़िल
इंसान अपनी मंज़िल से उतना ही दूर है, जितना दूर वो अपने कुतूहल से है। जानने की इच्छा न हो, नए से नया देखने का कौतूहल न हो तो इंसान चलता ही नहीं; और, चले बिना मंजिल भला किसे मिलती है!और भीऔर भी
गुरु सच्चा
भगवान के भ्रमजाल में फंसानेवाला शख्स सच्चा गुरु नहीं हो सकता क्योंकि भगवान तो अपनी कमियों-कमजोरियों को पूरा करने के लिए खुद हमारे द्वारा समय व स्थान से हिसाब से गढ़ी गई छवि है।और भीऔर भी
मानो या न मानो
जीने के दो ही तरीके हैं। एक, दिए हुए हालात को जस का तस स्वीकार कर उसी में अपनी कोई जगह बना ली जाए। दो, हालात से ऊपर उठकर नई संभावनाओं को तजबीज कर उन्हें मूर्त रूप दे दिया जाए।और भीऔर भी
इतने कृपालु क्यों?
दलित के नाम पर आप क्यों सत्ता पाना चाहती हैं बहनजी? जनता के नाम पर आप सरकार में क्यों आना चाहते हैं नेताजी? जनता पर यूं मुफ्त कृपा बरसाने के पीछे की असली नीयत तो खोलिए जनाब!और भीऔर भी
निंदक नियरे राखिए
हमें अपने इर्दगिर्द हमेशा ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो हमारी आंखों में आंखें डालकर सच बोल सकें। खासकर तब, जब हमारे दिन खराब चल रहे हों और हम बार-बार अपने लक्ष्य से चूक रहे हों।और भीऔर भी
