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झूठ नहीं, अर्ध-सत्य भी नहीं, केवल अर्थसत्य!

बड़ा अजीब है अमृतकाल का यह दौर। जो भी ज्यादा मुखर हैं और जिनकी आवाज़ सुनी या सुनवाई जा रही है, वे सब के सब झूठ बोल रहे हैं। सत्ता का अमृत चखने के चक्कर में कोई अर्ध-सत्य तक नहीं बोल रहा। ऐसे में अर्थव्यवस्था का पूरा सच जानना ज़रूरी है। ‘ट्रेडिंग बुद्ध’ कॉलम में हम 13 जुलाई से अर्थव्यवस्था का सच उजागर करेंगे। 7 सितंबर से यह कॉलम मूल रूप में लौट आएगा।

इस दौरान ‘तथास्तु’ का साप्ताहिक कॉलम बदस्तूर जारी रहेगा।

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ऋद्धि-सिद्धि (Page 444)

सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…

whishes and hurdles

इच्छा-पूर्ति की बाधा

2014-03-22
By: अनिल रघुराज
On: March 22, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

inside-the-frame

फ्रेम का मोह

2014-03-21
By: अनिल रघुराज
On: March 21, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

discipline and you

बनारस में बनारसी

2014-03-20
By: अनिल रघुराज
On: March 20, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

today and tomorrow

कल के कि आज के!

2014-03-19
By: अनिल रघुराज
On: March 19, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

force has noshape

शक्ल नहीं शक्तियों की

2014-03-18
By: अनिल रघुराज
On: March 18, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

like firefly

जुगनू की तरह

2014-03-17
By: अनिल रघुराज
On: March 17, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

balance time

समय साधना

2014-03-16
By: अनिल रघुराज
On: March 16, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

value is social

मूल्य हैं सामाजिक

2014-03-15
By: अनिल रघुराज
On: March 15, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

stars and glamour

सितारों का सच

2014-03-14
By: अनिल रघुराज
On: March 14, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

rely on self

भरोसा केवल अपने पर

2014-03-13
By: अनिल रघुराज
On: March 13, 2014
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • पकड़ें संभावना, मल्टी-बैगर लगेगा हाथ
    30 Aug 2026

    बाज़ार अपना चार महीनों से कदमताल किए जा रहा है। इस साल 29 अप्रैल को निफ्टी-50 सूचकांक 24,177.65 पर बंद हुआ था और अभी 28 अगस्त को 24,175.65 पर है। वहीं, साल के दूसरे दिन 2 जनवरी को यह 26,328.55 पर था, जहां से अब तक 8.18% गिर चुका है। निराशा और पस्ती का आलम है। देशी निवेशक संस्थाएं खासकर म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां ज्यादा खरीद रही हैं, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उनसे कम बेच रहे […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • क्षुद्र राजनीति से अर्थशास्त्र का बंटाधार!
    31 Aug 2026

    भारत देश, उसके जन-जन, पेड़-पालव, सारी वनस्तियां, पशु-पक्षी, जल, जंगल, ज़मीन और अर्थव्यवस्था या जीडीपी सब हमारे अपने हैं, सगे हैं। लेकिन बारह साल से प्रधानमंत्री के पद पर बैठे नरेंद्र मोदी का इनमें से कोई भी सगा नहीं। यहां तक कि न वे अपने परिवार के हैं और न ही उनका परिवार उन्हें सगा मानता है। 76 साल की उम्र में भी उनकी वासना केवल अपनी अय्याशी और अपनों के साम्राज्य को बढ़ाते जाना है। इसके लिए उन्हें देश की अक्षुण्ण सत्ता चाहिए, जिसके लिए वे किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं। यही उनकी राजनीति में घुसी क्षुद्रता का मूल स्रोत है। बाकी तो संघ का हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्व भी उनके लिए महज मुखौटा है। उनके अपनों में चंद कॉरपोरेट यारों के साथ वे सभी हैं जो भारत के जनधन व राष्ट्रीय सम्पदा को लूटने की नीयत, हसरत और लिप्सा रखते हैं। कहा जाता हैं कि वे कॉरपोरेट क्षेत्र के सेवादार और उसके पाले-पोसे पठ्ठे हैं। लेकिन यह पूरा सच नही। ऐसा होता तो उनके राज में तमाम भारतीय कंपनियां देश छोड़कर बाहर निवेश क्यों करतीं? दरअसल उनकी क्षुद्र राजनीति और येनकेन प्रकारेण ‘मित्रों’ का ही भला करने की फितरत ने व्यापक कॉरपोरेट क्षेत्र को उनकी सरकार के प्रति शंकालु बना दिया है। कंपनियां डरती हैं कि उसकी पूंजी से बने उद्यम को मोदी का कोई यार झटक न ले जाए…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

और भी

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