Skip to content
arthkaam narrow header
।।अर्थकाम।। Be financially clever!

झूठ नहीं, अर्ध-सत्य भी नहीं, केवल अर्थसत्य!

बड़ा अजीब है अमृतकाल का यह दौर। जो भी ज्यादा मुखर हैं और जिनकी आवाज़ सुनी या सुनवाई जा रही है, वे सब के सब झूठ बोल रहे हैं। सत्ता का अमृत चखने के चक्कर में कोई अर्ध-सत्य तक नहीं बोल रहा। ऐसे में अर्थव्यवस्था का पूरा सच जानना ज़रूरी है। ‘ट्रेडिंग बुद्ध’ कॉलम में हम 13 जुलाई से अर्थव्यवस्था का सच उजागर करेंगे। 7 सितंबर से यह कॉलम मूल रूप में लौट आएगा।

इस दौरान ‘तथास्तु’ का साप्ताहिक कॉलम बदस्तूर जारी रहेगा।

Secondary Navigation Menu
Menu
  • अर्थव्यवस्था
    • उद्योगमैन्यूफैक्चरिंग से लेकर समूचे सेवा क्षेत्र से जुड़ी नीतियां व विकासक्रम
    • कृषिउस क्षेत्र का हाल जिस पर निर्भर है देश की 60 फीसदी से ज्यादा आबादी
    • वित्त बाजारवित्तीय बाजार पर असर डालनेवाली हर खबर, विश्लेषण के साथ
    • बजटबजट के प्रावधानों से लेकर सरकारी नीतियों का लेखाजोखा
  • ऋद्धि-सिद्धि
  • ऑप्शन ट्रेडिंग
  • जीवन-सार
  • ट्रेडिंग-बुद्ध
  • धन-मंत्र
  • निवेश
  • तथास्तु
  • विचार
    • आपकी बातसमाज के बीच से आए असली व सार्थक विचार
    • मेरी बातकिसी सामयिक प्रसंग पर संपादक का विश्लेषण
    • इनकी बातकिसी खास हस्ती के रोचक विचार
    • उनकी बातवित्तीय जगत से जुड़े किसी शख्स के व्यवहारिक विचार
  • संपर्क
  • पेड सेवा
  • Login

ऋद्धि-सिद्धि (Page 357)

सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…

together we grow

साथ-साथ चलना, साथ-साथ बढ़ना

2016-08-08
By: अनिल रघुराज
On: August 8, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

deep vision

गहन दृष्टि का सत्तालोक

2016-08-07
By: अनिल रघुराज
On: August 7, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

focus

ध्यान लगाना, ध्यान हटाना

2016-08-06
By: अनिल रघुराज
On: August 6, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

infinite link to know

जानने-समझने की अनंत कड़ी

2016-08-05
By: अनिल रघुराज
On: August 5, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

future is in the hands of

भविष्य इनका नहीं, उनका

2016-08-04
By: अनिल रघुराज
On: August 4, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

be like yourself

बनना अपने जैसा

2016-08-03
By: अनिल रघुराज
On: August 3, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

live

जीना सांस-दर-सांस

2016-08-02
By: अनिल रघुराज
On: August 2, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

broil and cycle

पचड़े के बिना खुशी नहीं

2016-08-01
By: अनिल रघुराज
On: August 1, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

kid to 55

बचपन से पचपन

2016-07-31
By: अनिल रघुराज
On: July 31, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

face vs character

सूरत नहीं, सीरत

2016-07-30
By: अनिल रघुराज
On: July 30, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

Posts pagination

Previous 1 … 356 357 358 … 586 Next

निवेश – तथास्तु

  • जिसका इंतज़ार, वो इतना गिर गया तो!
    19 Jul 2026

    शेयर बाज़ार में अक्सर ऐसा कुछ होता रहता है जो पहले कभी नहीं हुआ। इसलिए दुनिया की तरह शेयर बाज़ार को भी स्थिर व शाश्वत नियमों से चलनेवाला तंत्र मान लेना गलत है। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि आईपीओ के बाद लिस्ट होने से पहले ही किसी कंपनी के शेयरों को बेचने की सलाह या सेल-कॉल दे दी जाए। लेकिन भारत ही नहीं, दुनिया में वोल्यूम के आधार पर सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज एनएसई के साथ […]

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  
« Jun    

पेड सेवा

tathastu logo

Pages

  • Free, फ्री, Free
  • Login
  • Mem Profile
  • अर्थकाम का बैनर अपने यहां लगाइए
  • अर्थकाम की पेड-सेवा
  • अर्थकाम कैलेंडर 2013
  • अर्थकाम कैलेंडर 2014
  • अर्थकाम कैलेेंडर 2015
  • आपके लेख
  • इस सेवा से जुड़ी ज़रूरी शर्तें
  • काम के लिंक
  • कॉपीराइट
  • डिस्क्लेमर
  • निवेश – तथास्तु!
  • पेड सेवा रजिस्ट्रेशन
  • बारी आपकी
  • मैं नहीं हम
  • यह पहल क्यों?
  • संपर्क

क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

Subscribe to ।।अर्थकाम।। by Email
         Paid Registration-Trading-Buddha                               Paid Registration -Tathastu                                    Free Registration

ट्रेडिंग – बुद्ध

  • शेयर बाज़ार माप नहीं, कोप का संकेत!
    20 Jul 2026

    शेयर बाज़ार कभी झूठ नहीं बोलता। कुछ समय के लिए उसे सायास नचाया जा सकता है। लेकिन लंबे समय के लिए नहीं। फिर यह विसंगति या विरोधाभास कैसे कि जब हमारा जीडीपी इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है तो शेयर बाज़ार गिरा ही जा रहा है? क्या सरकार का जीडीपी झूठ बोल रहा है? आईएमएफ तक यह कह चुका है। उसके दबाव में भारत सरकार को जीडीपी से लेकर मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक तक को नापने का तरीका बदलना पड़ा। लेकिन नीयत में खोट हो और सारा इको-सिस्टम ही झूठ की मुनादी करने लगा हो तो देश का आर्थिक सच अपने प्रत्यक्ष अनुभवों या प्रज्ञा के आधार पर ही महसूस किया जा सकता है। वैसे, किताबें कहती हैं कि शेयर बाज़ार अर्थव्यवस्था नहीं है। इसलिए इस समय न तो देश का जीडीपी झूठ बोल रहा है और न ही शेयर बाज़ार। प्रत्यक्ष अनुभव की भी अपनी सीमा है। फिर देश के सम्पूर्ण आर्थिक सच तक कैसे पहुंचा जाए? इसमें प्रेस और मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनकर अहम भूमिका निभाता सकता है। लेकिन अपने यहां 99% प्रेस व मीडिया सरकार को बिक चुका है, जबकि सोशल मीडिया अर्थव्यवस्था पर महज छिछली खिलाता जा रहा है। आईएमएफ का प्रोजेक्शन है कि भारत का जीडीपी 2026 या वित्त वर्ष 2026-27 में 4.15 ट्रिलियन डॉलर का हो सकता है, जबकि अभी 2025-26 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर का रहा है। मगर सोशल मीडिया के दिग्गज देश के जीडीपी को अभी से 4.15 ट्रिलियन का बताए जा रहे हैं।

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

और भी

© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom