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झूठ नहीं, अर्ध-सत्य भी नहीं, केवल अर्थसत्य!

बड़ा अजीब है अमृतकाल का यह दौर। जो भी ज्यादा मुखर हैं और जिनकी आवाज़ सुनी या सुनवाई जा रही है, वे सब के सब झूठ बोल रहे हैं। सत्ता का अमृत चखने के चक्कर में कोई अर्ध-सत्य तक नहीं बोल रहा। ऐसे में अर्थव्यवस्था का पूरा सच जानना ज़रूरी है। ‘ट्रेडिंग बुद्ध’ कॉलम में हम 13 जुलाई से अर्थव्यवस्था का सच उजागर करेंगे। 7 सितंबर से यह कॉलम मूल रूप में लौट आएगा।

इस दौरान ‘तथास्तु’ का साप्ताहिक कॉलम बदस्तूर जारी रहेगा।

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ऋद्धि-सिद्धि (Page 268)

सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…

fullfilled life

ज़िंदगी बने संपूर्ण

2019-01-29
By: अनिल रघुराज
On: January 29, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

thrill of life

जीवन का थ्रिल

2019-01-28
By: अनिल रघुराज
On: January 28, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

forever living

अमरत्व का सूत्र

2019-01-27
By: अनिल रघुराज
On: January 27, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

ganatantra divas

जनधन और गणतंत्र

2019-01-26
By: अनिल रघुराज
On: January 26, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

many lives

कौन-सी ज़िंदगी

2019-01-25
By: अनिल रघुराज
On: January 25, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

living like brave

कायर तरीका, बहादुर सलीका

2019-01-24
By: अनिल रघुराज
On: January 24, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

pigmy is mountain

पिद्दी पहाड़

2019-01-23
By: अनिल रघुराज
On: January 23, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

not outside power

अपना कल्याण अपने हाथ

2019-01-22
By: अनिल रघुराज
On: January 22, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

into others mind

दूसरे के दिमाग में घुसना

2019-01-21
By: अनिल रघुराज
On: January 21, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

quest for truth

सच बिना अधूरे

2019-01-20
By: अनिल रघुराज
On: January 20, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • बाज़ार में छोटों के लिए सूत्र दौलत का!
    26 Jul 2026

    आम या रिटेल निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में सीधे निवेश का सूत्र इसमें छिपा है कि कैसे छोटी कंपनियों को तब पकड़ लिया जाए, जब उन पर बड़े निवेशकों की नज़र न पड़ी हो। वैसे भी छोटी कंपनियों को म्यूचुअल फंड या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक आईपीओ के बाद अमूमन हाथ नहीं लगाते क्योंकि उनकी खरीद इतनी बड़ी होती है कि छोटी कंपनियों के शेयर अचानक चढ़ जाते हैं। इसलिए छोटी और संभावनामय कंपनियां दौलत बनाने के […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • वो सच, जिसको छिपा रहा है रिजर्व बैंक
    27 Jul 2026

    देश की मौद्रिक संस्था भारतीय रिजर्व बैंक कहने को अब भी स्वायत्त है। हालांकि मोदी सरकार ने पिछले बारह सालों में उसका ऐसा बधियाकरण किया है कि सरकार की हां में हां मिलाना उसकी फितरत बन गई है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखना, आर्थिक विकास को सुगम बनाना और इसके अनुरूप नीतियां बनाना उसकी ज़िम्मेदारी है। लेकिन सरकार को खुश रखने के चक्कर में वो इतना असंगत हो गया है कि उसका रुख, अनुमान और फैसला एक दिशा के बजाय अलग-अलग दिशाओं में भागता नज़र आता है। कोई यीर घाट तो कोई वीर घाट। कहीं कोई स्पष्टता नहीं। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 3-4-5 अगस्त को होनी है। इससे दो महीने पहले 3-4-5 जून को हुई पिछली बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को जस का तस रखने और ठंडा रुख अपनाने का निर्णय लिया। न नरम, न गरम। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में रिटेल मुद्रास्फीति के 4.65% और दूसरी छमाही में 5.65% हो जाने का उसका अनुमान है। जून में रिटेल मुद्रास्फीति 17 महीनों में पहली बार रिजर्व बैंक की निर्धारित दर 4% के पार 4.38% पर पहुंच गई, जबकि थोक मुद्रास्फीति 44 महीनों के सर्वोच्च स्तर 9.87% पर जा पहुंची। पश्चिम एशिया के उबाल और अल-निनो की आपदा के बीच भी रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित क्यों रखा?

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

और भी

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