लोन के लिए रिश्वतखोरी के मामले में बड़े नायाब किस्म के एसएमएस इस्तेमाल किए गए हैं। जैसे, बिचौलिये को संदेश मिला कि ऑल इज़ वेल तो मतलब कि लोन मंजूर हो गया है। अगर बैंक या वित्तीय संस्था के अधिकारी ने एसएमएस में लिखा – चाइनीज क्यूजीन तो मतलब कि रिश्वत तगड़ी चाहिए। पंजाबी फूड के एसएमएस का मतलब होता है कि रिश्वत सोने के जेवरात, महंगी घड़ियों या इसी तरह के साजोसामान के रूप में चाहिए।औरऔर भी

भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यस बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के खाताधारक मोबाइल फोन के जरिए एक-दूसरे के खाते में रकम भेज सकते हैं। इन सात बैंकों को यह इंटरबैंक मोबाइल पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) उपलब्ध करा रहा है। 31 मार्च 2011 तक वह बैंकों से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लेगा। लेकिन उसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर वह 25 पैसे लेगा। बैंकऔरऔर भी

भारत जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा आयात करता है। केवल माल के व्यापार की बात करें तो विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2009 में हमारा व्यापार घाटा (आयात व निर्यात का अंतर) 87 अरब डॉलर था। दुनिया में केवल ब्रिटेन (129 अरब डॉलर) और अमेरिका (549 अरब डॉलर) हम से ऊपर थे। माल व सेवा को मिला दें तो शुद्ध आयात में हम केवल अमेरिका से पीछे हैं। अमेरिका का आंकड़ा 699 अरबऔरऔर भी

इस समय देश में विभिन्न जगहों पर 25 किसान कॉल सेंटर चल रहे हैं। कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले कृषि व सहकारिता विभाग (डीएसी) ने इस सेवा की शुरुआत जनवरी 2004 में की थी। इसका मकसद किसानों की समस्याओं का समाधान उनकी अपनी भाषा में करना है। इन कॉल सेंटरों में अक्टूबर 2010 तक 55.75 लाख कॉल आ चुकी हैं। वैसे, हैदराबाद के एडमिस्ट्रेटिव स्टॉफ कॉलेज की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इन कॉल सेंटरों से संपर्कऔरऔर भी

1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत में सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेते ही ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक खातों के लेखा-परीक्षण की अहमियत समझ ली थी। उसने 16 नवंबर 1860 को भारत का पहला महा लेखा-परीक्षक एडमंड ड्रुमंड को बनाया था। ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद भारत 1950 में गणराज्‍य बन गया और महा लेखा-परीक्षक का पद जारी रहा हालांकि इसका नाम बदलकर भारत का नियंत्रक एवं महा लेखा-परीक्षक (सीएजी या कैग) कर दियाऔरऔर भी

देश की 1.44 लाख बस्तियों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी खुद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सी पी जोशी ने दी है। उनके मुताबिक एक अप्रैल 2010 तक देश की 1.44 लाख बस्तियों के पेयजल में फ्लोरीन, लवण, लोहा, आर्सेनिक या नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा पायी गई है। इसमें 26,131 बस्तियों के पेयजल में अत्यधिक फ्लोरीन, 28,398 बस्तियों में अत्यधिक लवण, 79,955 बस्तियों में अत्यधिक लोहा, 6548 बस्तियों में अत्यधिक आर्सेनिक और 3032 बस्तियों मेंऔरऔर भी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत में लोगों के पास 18,000 टन सोना पड़ा है जो दुनिया में उपलब्ध सोने का कम से कम 11% है। इसका औसत निकालें तो हर भारतीय के पास करीब 15 ग्राम सोना है। भारतीयों के पास पड़े सोने की कीमत लगभग 800 अरब डॉलर निकलती है। साल 2009 में भारत में सोने की मांग 97,400 करोड़ रुपए की थी जो सारी दुनिया की मांग का 15% बैठती है। हमारी बचत दरऔरऔर भी

देश में 53% कुओं के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। जलस्तर में इस गिरावट का आकलन मई 2001 से मई 2010 के दौरान देश के 15,640 कुओं से लिए गए भू-जल स्तर संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर किया गया है। आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, तमिलनाडु, त्रिपुरा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केंद्रशासित क्षेत्रों चंडीगढ़ व पुदुचेरी के कुछऔरऔर भी

कोल इंडिया भारतीय पूंजी बाजार के लिए बहुत कुछ नया लेकर आई है। वह लिस्टिंग के बाद देश में बाजार पूंजीकरण के लिहाज से चौथी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। पहले दिन उसके शेयरों में आईपीओ के कुल आकार की 1.44 गुना ट्रेडिंग हुई। एनएसई और बीएसई के कैश सेमगेंट में इसके कुल 22,024.02 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है। इसमें से एनएसई में हुआ कारोबार 15,699.92 करोड़ रुपए और बीएसई में 6324.10 करोड़ रुपए काऔरऔर भी

देश में कुल श्रमिकों की संख्या करीब 40 करोड़ है। इसका 91% हिस्सा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का है और केवल 3.5 करोड़ के आसपास मजदूर ही संगठित क्षेत्र में काम करते हैं। संगठित क्षेत्र के मजदूर भी विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़ी करीब 15 ट्रेड यूनियनों में बंटे हैं। सरकार से बातचीत करने के लिए इनका कोई शीर्ष निकाय नहीं है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, न्यूजीलैंड, जापान और यहां तक कि पाकिस्तान में भी ट्रेड यूनियनोंऔरऔर भी