कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010-11 में देश में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन 24.156 करोड़ टन रहा है। यह पिछले साल के उत्पादन 21.811 करोड़ टन से 10.75% अधिक है। खाद्यान्न उत्पादन का पिछला रिकॉर्ड 2008-09 में 23.447 करोड टन का था। इस बार 8.592 करोड़ टन गेहूं और 1.809 करोड़ टन दालों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। इसी तरह मोटे अनाज, मक्का, उड़द, मूंग, चना, तिलहन व सोयाबीन में इस बार सर्वाधिक उत्पादन हुआऔरऔर भी

केंद्र सरकार को कुल टैक्स का 56% हिस्सा अब आयकर या कॉरपोरेट करों के रूप में प्रत्यक्ष करों से मिंलता है। बाकी 44% टैक्स ही एक्साइज व कस्टम जैसे परोक्ष करों से मिलता है। नब्बे के दशक तक स्थिति यह थी कि सरकार को मात्र 12% प्रत्यक्ष करों से मिलते थे और 88% अप्रत्यक्ष या परोक्ष करों से। वित्त वर्ष 2010-11 में केंद्र सरकार का कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.46 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि परोक्षऔरऔर भी

इस समय देश में आयकर विभाग के कुल 53,000 पदों में से लगभग 22 फीसदी खाली पड़े हैं। यह संख्या 11,500 के आसपास बनती है। ऐसा तब हो रहा है जब काले धन का शोर उठा हुआ है और सरकार कर-चोरी को रोकने के दावे कर रही है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2010-11 में अटके हुए टैक्स की रकम 2.63 लाख करोड़ रुपए रही है। आयकर विभाग खाली पदों को भरने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष करऔरऔर भी

2011 की जनगणना के अनुसार देश की 121 करोड़ की आबादी का 56.9% हिस्सा 15 से 59 साल यानी काम करने की उम्र का है। 60 साल या इससे ऊपर की आबादी का अनुपात 7.5% है। बाकी 35.6% बच्चे हैं 15 साल से कम उम्र के। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कहते हैं कि अगले तीस सालों में देश में दूसरों पर निर्भर रहनेवालों का अनुपात तेजी से घटेगा। अगले बीस सालों में कामकाजी आबादी तेजी से बढ़ेगीऔरऔर भी

भारत पर मार्च 2011 तक चढ़े कुल विदेशी ऋण की मात्रा 305.89 अरब डॉलर है। यह साल भर पहले मार्च 2010 तक के विदेशी ऋण 261.04 अरब डॉलर से 17.2% ज्यादा है। देश के पास फिलहाल 310.56 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। 305.89 अरब डॉलर के मौजूदा विदेशी ऋण में 240.90 अरब डॉलर के ऋण लंबी अवधि और 64.99 अरब डॉलर के ऋण छोटी अवधि के हैं। इसमें आईएमएफ से लिया ऋण 6.31 अरब डॉलर, औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था में 14.36 फीसदी, लेकिन रोजगार में 60 फीसदी से ज्यादा योगदान देनेवाली कृषि की किस्मत मानसून पर निर्भर है। साल भर की कुल बरसात का 80 फीसदी हिस्सा जून से सितंबर तक मानसून के चार महीनों में बरसता है। मानसून खराब तो कृषि खराब। कृषि खराब तो मांग का टोंटा और खाद्य पदार्थों की कीमत में आग। फिर उसे थामने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने का चक्र। मानसून से अनाज व नकदी फसलों केऔरऔर भी

भारत ने दुनिया के 79 देशों के साथ दोहरा कराधान बचाव संधि (डीटीएए) कर रखी है। इसमें मॉरीशस व स्विटजरलैंड शामिल हैं। संधि के तहत कंपनी का मूल पता जिस देश का है, वहीं उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स लग सकता है। जहां से उसने कमाया है, वहां पर नहीं। हालांकि लाभांश, रॉयल्टी व ब्याज आय पर दोनों ही देशों में टैक्स लगता है। लेकिन टैक्स की दर लाभांश पर 7.5% और ब्याज व रॉयल्टी पर 10%औरऔर भी

ऑस्ट्रेलिया में एक दशक  में भारतीय मूल के लोगों की तादाद तिगुनी से ज्यादा हो गई। 2010 तक के आंकड़ों के अनुसार वहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी 3.40 लाख है, जबकि वर्ष 2000 में यह 96,000 थी। इस दौरान वहां एशियाई मूल के सारे लोगों की आबादी 10.03 लाख से बढ़कर 20.01 लाख हो गई, जबकि ब्रिटिश मूल के लोगों की आबादी 12 लाख के आसपास है। वर्ष 1947 में वहां सिर्फ 0.3% ही एशियाईऔरऔर भी

भारतीय कंपनियों को पूरे वित्त वर्ष का टैक्स हर तिमाही थोड़ा-थोड़ा करके जमा करना होता है। पहली तिमाही में अनुमानित सालाना लाभ पर टैक्स का 15 फीसदी, दूसरी व तीसरी तिमाही में 30-30 फीसदी और चौथी तिमाही में बाकी बचा 25 फीसदी टैक्स चुकाना होता है। इसे जमा करने की अंतिम तिथियां 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च होती हैं। शेयर कारोबारियों को हर तिमाही एडवांस टैक्स के इन आंकड़ों का बड़ी बेसब्री सेऔरऔर भी