शेयर बाजार में इस वक्त निवेशकों का नहीं, ट्रेडरों का बोलबाला है। 3 अक्टूबर को बाजार खुलने से पहले हमने ज्यादा कुछ न बताकर इतना कहा था कि नेस्को बहुत ही मजबूत और संभावनामय कंपनी है। इसमें बढ़त का रुझान भी है। बस क्या था? संकेत मिला नहीं कि ट्रेडरों की मौज हो गई। रण बीच चौकड़ी भरने लगे। एकदम चेतक की तरह, जिसके बारे में कविता है कि राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतकऔरऔर भी

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जो भी पैदा हुआ है, वह मरेगा। यह प्रकृति का चक्र है, नियम है। ट्रेन पर सवार हैं तो ट्रेन की होनी से आप भाग नहीं सकते। कूदेंगे तो मिट जाएंगे। यह हर जीवधारी की सीमा है। इसमें जानवर भी हैं, इंसान भी। लेकिन जानवर प्रकृति की शक्तियों के रहमोकरम पर हैं, जबकि इंसान ने इन शक्तियों को अपना सेवक बनाने की चेष्ठा की है। इसमें अभी तक कामयाब हुआ है। आगे भी होता रहेगा। मगर, यहांऔरऔर भी

वोकहार्ट का स्टॉक/शेयर सोमवार, 8 अक्टूबर से बीएसई के मिड कैप सूचकांक से बाहर निकाल दिया जाएगा। इस खबर के आने के बाद यह थोड़ा-सा गिरकर बीएसई (कोड – 532300) में 1277.80 रुपए और एनएसई (कोड – WOCKPHARMA) में 1275.95 रुपए पर बंद हुआ है। लेकिन इससे न तो इस स्टॉक और न ही कंपनी पर कोई फर्क पड़ता है। किसे पता था कि इसी साल 6 जनवरी 2012 को पांच रुपए अंकित मूल्य का जो शेयरऔरऔर भी

काश! ऐसा होता कि अर्थशास्त्र और राजनीति दोनों एकदम अलग-अलग होते। ऐसा होता तो अपने यहां सेंसेक्स बहुत जल्द छलांग लगाकर 23000 अंक तक पहुंच जाता। हाल में बहुत-सी ब्रोकर फर्मों ने रिपोर्ट जारी कर भविष्यवाणी भी की है कि इस नहीं, अगली दिवाली तक जरूर सेंसेक्स 23,000 के पार चला जाएगा। लेकिन राजनीति और अर्थशास्त्र अलग-अलग हैं नहीं। इसीलिए राजनीतिक अर्थशास्त्र की बात की जाती है। इसी से बनता है पूरा सच और वो सच यहऔरऔर भी