कल कोल इंडिया और एनटीपीसी दोनों में सुबह-सुबह मीडिया में नकारात्मक खबरें आ गईं। फिर भी कोल इंडिया का शेयर 1.26% और एनटीपीसी का शेयर 2.32% बढ़ गया। इसीलिए हम सावधान करते आए हैं कि आम लोगों को छपी खबरों के आधार पर ट्रेड नहीं करना चाहिए। असल में खबरों के आने और जाहिर होने का जो भी समीकरण है, वो हमारे लिए झांसे जैसा है। भावों में ही हर ऊंच-नीच समाहित है। अब गुरु का बाज़ार…औरऔर भी

विख्यात अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने 1776 में छपी किताब वेल्थ ऑफ नेशंस में लिखा था कि बाज़ार में सप्लाई मांग से ज्यादा होने पर वस्तु के भाव गिर जाते हैं। मशहूर वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन ने 1687 में बताया कि कोई भी वस्तु तब तक गतिशील रहेगी जब तक उसका मुकाबला उसके बराबर या उससे ज्यादा बल की वस्तु से नहीं होता। इन्हीं नियमों पर आधारित है मांग और सप्लाई की पद्धति। इसे अपनाते हुए करते हैं ट्रेडिंग…औरऔर भी

सेंसेक्स व निफ्टी ऐतिहासिक शिखर पर। पर 9 दिसंबर 2010 से 9 दिसंबर 2013 के बीच जहां सेंसेक्स 10.8% और निफ्टी 10.4% बढ़ा है, वहीं सन फार्मा 162%, हिंद यूनिलीवर 93.1%, आईटीसी 87%, टीसीएस 86.7% और एचडीएफसी बैंक 55.5% बढ़ा है। सो, सूचकांकों के ही दम पर निवेश या ट्रेडिंग करने वाले लोग प्रायः मुनाफे के अच्छे मौकों से चूक जाते हैं। तो कैसे देखें सूचकांकों के भी पार! इसे ध्यान में रखते हुए बढते हैं आगे…औरऔर भी

आज बाज़ार अगर बढ़ा तो बताया जाएगा कि चार राज्यों के चुनाव नतीजों ने अगले आम चुनाव में मोदी को लाने का जबरदस्त संकेत दिया है। बाज़ार गिरा तो कहा जाएगा कि अमेरिका में नवंबर माह में उम्मीद से ज्यादा रोज़गार पैदा हुआ और बेरोजगारी की दर घटकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 7% पर आ गई। इसलिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक सस्ते धन का प्रवाह रोक सकता है। यह सब कहने की बातें हैं। देखें असली दांवपेंच…औरऔर भी

किसी भी अर्थशास्त्री से पूछें कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने की सबसे बड़ी रुकावट क्या है तो दस में नौ का जवाब होगा कमज़ोर इंफ्रास्ट्रक्चर। अगर आज हमारा कॉरपोरेट क्षेत्र नमो-नमो कहते हुए नरेंद्र मोदी की जयकार कर रहा है तो उसकी बड़ी वजह यह है कि उसे लगता है कि मोदी प्रधानमंत्री बने तो देश का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधर  सकता है। यह उम्मीद आगे दबाव का काम करेगी। इसलिए आज तथास्तु में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी