हम अगर शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं तो कंपनियों के विकास में हिस्सेदारी करते हैं। आईपीओ के जरिए प्राइमरी बाज़ार में लगाया गया धन बिना किसी ब्याज व देनदारी के सीधे कंपनी को मिल जाता है। ऐसा न हो तो कंपनी के लिए पूंजी की लागत बढ़ जाएगी। सेकेंडरी बाज़ार/स्टॉक एक्सचेंज इस निवेश के रिस्क को संभालने का माध्यम हैं। वो हमें जब चाहें, निकल जाने का मौका देता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

विचित्र, किंतु सत्य है कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई शिव का धनुष तोड़ने जैसा पराक्रम हो गया है। बड़े-बड़े महारथी बड़े दम-खम और दावे के साथ ट्रेडिंग में उतरते हैं। लेकिन शिव का धनुष तोड़ने की बात तो छोड़िए, उसे टस से मस तक नहीं कर पाते। मैं यह बात हवा में नहीं, बड़े-बड़े महारथियों से बातचीत के आधार पर कह रहा हूं। कुछ दिन पहले की बात है। इंजीनियरिंग छोड़कर होलटाइम ट्रेडिंग में लगेऔरऔर भी

हर निवेशक/ट्रेडर के दो सबसे बड़े दुश्मन हैं उसका अपना अतिविश्वास और भीड़ की मानसिकता। हम ताल ठोंककर मानते हैं कि जितना जान सकते हैं, उससे भी ज्यादा जानते हैं। भीड़ की मानसिकता यह है कि ज्यादातर लोग ऐसा कर रहे हैं तो हमें भी वैसा करना चाहिए। हर किसी में ये दोनों प्रवृत्तियां किसी न किसी मात्रा में होती हैं। लेकिन ये दोनों ही हमारी मेहनत से जुटाई पूंजी को खा जाती हैं। समझिए, बचिए, बढ़िए…औरऔर भी

शेयरों के भाव और कंपनी नतीजों में क्या आज और अभी का सीधा संबंध है? अगर होता तो कल पंद्रह तिमाहियों के बाद पहली बार शुद्ध लाभ में बढ़ोतरी, वो भी शानदार 115% की, हासिल करने के बावजूद भारती एयरटेल का शेयर 1.52% गिर नहीं गया होता! यहीं काम करती हैं उम्मीदें। एयरटेल इसलिए गिरा क्योंकि उससे ज्यादा शुद्ध लाभ की उम्मीद थी और जनवरी में दिसंबर तक की उम्मीद हवाई नहीं होती। अब गुरु का चक्र…औरऔर भी

इस समय दुनिया भर में हाई फ्रीक्वेंसी और अल्गोरिदम ट्रेडिंग पर बहस छिड़ी हुई है। इस हफ्ते सोमवार और मंगलवार को हमारी पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने भी इस पर दो दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किया। इससे एक खास बात यह सामने आई कि सेकंड के हज़ारवें हिस्से में ट्रेड करनेवाले ऐसे महारथी भी पहले छोटे सौदों से बाज़ार का मूड भांपते हैं और पक्का हो जाने पर बड़े सौदे करते हैं। अब वार बुधवार का…औरऔर भी