हम चाहकर भी सारे काम अकेले नहीं कर सकते। कुछ काम दूसरों को सौंपना ही पड़ता है। आपस की इसी निर्भरता से बनता है समाज और चलते हैं व्यापार और उद्योग-धंधे। काम की चीज़ सेवा भी हो सकती है और कोई उत्पाद भी। उत्पाद आम खपत का भी हो सकता है और औद्योगिक खपत का भी। उत्पाद ऐसा हो जिसके बिना काम नहीं चल सकता तो उसका धंधा फलता-फूलता है। तथास्तु में ऐसी ही संभावनामय छोटी कंपनी…औरऔर भी

कोई सरिया, कोई एल्यूमीनियम शीट, कोई ब्रास तो कोई स्कैप और कोई मसाले या तेल का व्यापार करता है। इन सब में ट्रेड की जानेवाली चीज़ मूर्त है, उसके थोक व खुदरा बाज़ार अलग-अलग होते हैं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी एक व्यापार है। लेकिन यहां ट्रेड की जानेवाली चीज दिखती नहीं और थोक व खुदरा का अलग-अलग नहीं, एक ही बाज़ार है। इसलिए यहां की डगर कठिन है, मुश्किल नहीं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

एनएसई में रोज़ाना करीब 1500 कंपनियों में ट्रेडिंग होती हैं। 50-60 के शेयर भाव स्थिर रहते हैं, जबकि बाकी के ऊपर-नीचे होते हैं। इसमें से भी 145 कंपनियां एफ एंड ओ सेगमेंट में हैं, जिसमें लॉन्ग और शॉर्ट दोनों ही सौदे हो सकते हैं। इसमें से हरेक को अपने लायक 15-20 स्टॉक्स छांट लेनी चाहिए। जिस दिन उनकी रग-रग से आप वाकिफ हो जाएंगे, आपको बाहर झांकने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

तमाम स्टॉक्स का स्वभाव अलग होता है। कोई स्थाई भाव से चले तो कोई ज्यादा उछल-कूद मचाए। इसीलिए हर स्टॉक में स्टॉप-लॉस का स्तर भिन्न होता है। हमें वही स्टॉक उसी भाव पर चुनने चाहिए, जब उसमें 2% से ज्यादा नुकसान की आशंका न हो। अगर वो उल्टी दिशा में 2% से ज्यादा जाने लगे तो फौरन निकल जाना चाहिए। साथ ही कुल नुकसान 6% होते ही उस महीने ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में आप सामनेवाले से ज़रा-सा भी बेहतर हुए तो कमाओगे। जैसे, 60% सौदे सही हुए और रिस्क-रिवॉर्ड 1:2 का भी रखा तो महीने के 20 में से आठ गलत सौदों में 2% के स्टॉप-लॉस के हिसाब से आपका घाटा हुआ 16%, जबकि बाकी 12 सौदों में 4% के हिसाब से 48% फायदा होगा। इस तरह कुल फायदा 32% निकला। ब्रोकरेज वगैरह काटकर महीने का 25% फायदा भी बहुत होता है। परखते हैं अब मंगलवार की दशा-दिशा…औरऔर भी