मोदी हैं किनके मालिक, किसके गुलाम!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को देश का प्रधानसेवक बताने से नहीं थकते। लेकिन मोदी सरकार किसकी मालिक और किसकी गुलाम हैं, इसे समझने के लिए केवल एक उदाहरण काफी है। बजट से पहले आम से लेकर खास तक, सभी लोग मांग कर रहे थे कि बीमा प्रीमियम पर लिया जा रहा 18% जीएसटी खत्म या कम कर दिया जाए। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। वहीं, केंद्र सरकार 2016 से हीऔरऔर भी
अंदर तक हिला हुआ है कॉरपोरेट क्षेत्र!
यूं तो अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारत को कोई खास अहमियत नहीं है। उसके कुल व्यापार में भारत का हिस्सा 2% से भी कम है। लेकिन वो भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार देश है। वित्त वर्ष 2024-25 में दिसंबर 2024 तक के नौ महीनों में भारत का कुल व्यापार 868.60 अरब डॉलर रहा है, जिसमें से अमेरिका का हिस्सा 95.02 अरब डॉलर या 10.94% था। यही नहीं, इस अवधि में अमेरिका के साथ भारतऔरऔर भी
मोदी सरकार के राष्ट्रवाद की अग्निपरीक्षा
भारत विकसित देश तब तक नहीं बन सकता, जब तक वो विश्व व्यापार में अपने झंडे नहीं गाड़ देता। इस समय करीब ग्यारह साल से मोदीराज के खांसने-खंखारने के बावजूद भारत की स्थिति बड़ी दयनीय बनी हुई है। 2013-14 में विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा लगभग 2.2% था, जबकि 2023-24 में बहुत खींच-खांचकर 2.6% के करीब पहुंचा है। इस अवधि में भारत की व्यापार हिस्सेदारी में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन यह वृद्धि चीन, वियतनाम औरऔरऔर भी
ईद मुबारक़, नए साल में चहकेगा बाज़ार
आज ईद-उल-फितर के मौके पर शेयर बाज़ार बंद है। ईद का यह त्योहार खुशी, एकता और सद्भाव का प्रतीक है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था व शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आता है। लेकिन बेहद दुखद है कि सत्ता में बैठी भाजपा के कारिंदों ने देश भर में जगह-जगह इस त्योहार के सद्भाव को तोड़ने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश के संभल से लेकर मेरठ तक उपद्रवियों के साथ ही प्रशासन ने भी साम्प्रदायिक माहौल में तनावऔरऔर भी
सही सवाल खोलते सफल निवेश की राह
शेयर बाज़ार अनिश्चितता से भरा है। लेकिन हमारे यहां निवेशक बराबर निश्चितता की तलाश में लगे रहते हैं। कौन-से शेयर खरीदूं जो जमकर रिटर्न देंगे? बाज़ार कहां तक गिरेगा या उठेगा? कौन-से एनालिस्ट, बिजनेस चैनल या अखबार सटीक सलाह देते हैं? फिर इन सवालों के पक्के जवाब पाने के लिए निवेशक तरह-तरह के एप्प, वेबसाइट, अखबारों, चैनलों व उनके सलाहकारों के चंगुल में खुद फंस जाते हैं और दूसरों को भी वॉट्स-अप ग्रुप जैसे माध्यनों से फंसातेऔरऔर भी





