हम खरीदने के सौदे ही क्यों करते हैं
शेयर बाज़ार में कमानेवाले तेज़ी से भी कमाते हैं और मंदी से भी। मसलन, अभी गिरावट का दौर चल रहा है। गिरनेवाले शेयरों की संख्या बढ़नेवाले शेयरों के कहीं ज्यादा है। मगर, हम खरीद के ही सौदे क्यों तलाशते हैं? जवाब है न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाने का लक्ष्य। गिरावट पर शॉर्ट-सेलिंग से कमाते हैं और ऐसा डेरिवेटिव्स में ही किया जा सकता है, जहां बहुत रिस्क है और भरपूर पूंजी लगती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
निवेश के अवसर रहते हैं बराबर
शेयर बाज़ार में निवेश करनेवाले जानते हैं कि सेंसेक्स की चाल किसी टीवी चैनल के क्राइम शो से भी ज्यादा सनसनीखेज़ है। वह कुछ साल में 33,000 से 1,00,000 तक पहुंच सकता है और एकाध महीने में 25,000 तक भी लुढ़क सकता है। यही रिस्क है शेयर बाज़ार में निवेश करने का। लेकिन उठने और गिरने, दोनों ही सूरत में यहां निवेश के मौके कभी कम नहीं होते। आज तथास्तु में निवेश का ऐसा ही एक मौका…औरऔर भी
जितने शांत, उतनी अच्छी होगी पकड़
हमारी इच्छा से परे शेयरों के भावों की स्वतंत्र गति होती है। वैसे तो हर सौदा विपरीत सौदे से नत्थी होकर ही पूरा होता है। लेकिन जब खरीदने की आतुरता ज्यादा और बेचने की कम हो या ज्यादातर बेचनेवाले निकल चुके हों, तभी भाव बढ़ते हैं। इसकी उल्टी स्थिति में गिरते हैं। हमें शांतभाव से यही पकड़ना है कि किस भाव पर प्रोफेशनल निवेशकों व संस्थाओं में खरीदने की आतुरता हो सकती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
कमाने की है एक नहीं, अनेक स्टाइल
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का कोई इकलौता स्टाइल नहीं है। यहां लोग तरह-तरह से कमाते हैं। एक परिचित सज्जन हैं जो 25-30% सालाना कमाने का लक्ष्य केवल 3-4 शेयरों में ही ट्रेडिंग से पूरा कर लेते हैं। एक अन्य जानकार हैं जो कभी स्टॉप-लॉस नहीं लगाते। फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों के चढ़ते स्टॉक खरीदते हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ गिरने पर ज्यादा खरीद लेते हैं। पर्याप्त कमा लेते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी







