शेयर बाज़ार में निवेश उन्हीं कंपनियों में करना चाहिए, जिनका बिजनेस हमें सही तरीके से समझ में आ जाए। यह समझ हर किसी को अलग-अलग हो सकती है। लेकिन रीयल एस्टेट एक ऐसा बिजनेस है जिसे मोटामोटी देश के हर कोने में रहनेवाला व्यक्ति अपने आसपास देखता और समझता होगा। हाल की बात करें तो इस क्षेत्र में पूरे साल 2023 और बीच 2024 तक अच्छी-खासी तेज़ी दिखाई दी। जमकर मांग आ रही थी तो दाम बढ़तेऔरऔर भी

रिजर्व बैंक पर भले ही केंद्र सरकार का पूरा मालिकाना हो, लेकिन वो कभी उसकी सेहत की चिंता नहीं करती, बल्कि राजा की तरह उससे वसूली करती रहती है। अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व भी अपना सरप्लस सरकार को देता है, लेकिन राज्यों के सदस्य बैंकों को लाभांश और अतिरिक्त कोष में धन डालने के बाद। वो भी सीधे सरकार को नहीं, बल्कि अमेरिकी कोषागार की आम निधि में। यह निधि भारत के कंसोलिडेटेड फंड जैसीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक का खजाना देश के लिए इतना पवित्र माना जाता रहा है कि वो भले ही लाखों करोड़ का मुनाफा कमा ले, उस पर एक धेले का भी टैक्स नहीं लगाया जाता। चूंकि रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन-48 के तहत उसे इनकम टैक्स या किसी तरह के दूसरे टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा गया ताकि उसका वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सकेऔरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक पहले भी कमाता था और अब भी कमाता है। वो अपना सारा खर्च खुद उठाता है। लेकिन उसके खजाने पर आज तक मोदी सरकार जैसा हाथ साफ किसी ने नहीं किया था। वो रुपए को संभालने के लिए बाज़ार में डॉलर बेचता है, उस पर भी कमाता है। मसलन, 2024-25 में उसने 399 अरब डॉलर बेचे, जबकि 2023-24 में 153 अरब डॉलर ही बेचे थे। उसकी कुल आस्तियों में विदेशी मुद्रा 64.4% और भारतऔरऔर भी

वित्त सचिव से रिजर्व बैंक के गवर्नर बने शक्तिकांत दास ने छह साल तक मोदी सरकार के दास की तरह काम किया। 12 दिसंबर 2018 को उनके गवर्नर बनने के बाद से 31 मार्च 2024 तक सरकार ने रिजर्व बैंक के खजाने से ₹6.61 लाख करोड़ साफ कर दिए। 10 दिसंबर 2018 को दास का कार्यकाल खत्म होने के अगले दिन से रिजर्व बैंक का गवर्नर संजय मल्होत्रा को बना दिया गया। मल्होत्रा भी केंद्र सरकार मेंऔरऔर भी