हम कहीं न कहीं मानकर बैठे हैं कि शेयर बाज़ार बराबर सीधी रेखा में चलता है। इसलिए कहां तक जाएगा, इसका अनुमान ट्रेन्ड-लाइन खींचकर लगाया जा सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि शेयर बाज़ार सीधी रेखा में नहीं, बल्कि हमेशा लहरों में चलता है। बढ़ता या गिरता है तो लहरों की शक्ल में। अगर बाज़ार की यह लहरें बंद हो जाएं तो वहां ट्रेडिंग करने के सारे मौके एकबारगी खत्म हो जाएंगे। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हम शेयर बाज़ार में इसीलिए गच्चा खाते हैं क्योंकि जो हमारे वश में है, उन्हीं पर ध्यान न देकर हम अनाप-शनाप बातों पर शक्ति और समय बरबाद करते हैं। पूछते और चैनलों पर देखते फिरते हैं कि बाज़ार आगे कहां जाएगा। यह फालतू सवाल है। इसका सही जवाब मिलना भी असंभव है। हां, इतिहास गवाह है कि जबरदस्त उठापटक के बावजूद शेयर लंबे समय में वित्तीय बाज़ार में सबसे ज्यादा रिटर्न देते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार निकट-भविष्य में कहां जाकर किधर थमेगा, यह हम-आप ही नहीं, कोई बड़े से बड़ा विद्वान या बाज़ार का उस्ताद भी नहीं बता सकता। शेयर बाजार पर फिलहाल जो साढ़े-साती लगी है, उन अनिश्चितताओं का भी हम कुछ बना-बिगाड़ नहीं सकते। इन पर हमारा कोई वश नहीं। लेकिन दो बातें हमारे वश में हैं। एक, हम किसी शेयर का कितना भाव लगाते हैं। दो, हम बाजार के उतार-चढ़ाव को कैसे लेते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अगस्त अंत से चालू अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते तक बीएसई में लिस्टेड 2733 कंपनियों में से 688 कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते के शीर्ष से 61% से ज्यादा, 495 के शेयर 51-60%, 485 के 41-50%, 440 के 31-40%, 342 के 21-30% और 171 के शेयर 11-20% गिर चुके हैं। इनमें से कुछ को खराब आर्थिक स्थिति तो बहुतों को बाज़ार के मौजूदा सेटिमेंट ने मारा है। आज तथास्तु में इनमें से निवेश के दो अच्छे अवसर…औरऔर भी