गढ़ना पड़ता है अपना ट्रेडिंग स्टाइल
अगर आपको लगता है कि वॉरेन बफेट, जॉर्ज सोरोस या राकेश झुनझुनवाला के तरीके आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में सफलता दिला देंगे तो यह आपका कोरा भ्रम है। यहां पर हर किसी को अपने रिस्क प्रोफाइल, पूंजी, मानसिक बुनावट व स्वभाव को ध्यान में रखते हुए खुद का ट्रेडिंग स्टाइल गढ़ना होता है। हमारे शेयर बाज़ार की क्या खासियत है, यहां किस तरह के लोग सक्रिय हैं, यह सब समझना पड़ता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
बाहर नहीं, भीतर है सफलता का सूत्र
किसी बाहरी मंत्र या टिप्स से आपको ट्रेडिंग में सफलता नहीं मिल सकती। बाहरी कम्पन तो आपको कहीं और भटका ले जाएंगे। आपको कल्पना लोक में गुम कर देंगे, जबकि आपकी मुक्ति आपके अपने कम्पनों में छिपी पड़ी है। हर बाहरी प्रभाव से परे आप जितना ज्यादा अपनी काया, चित्त, उसकी वृत्तियों और संवेदनाओं में हर पल उभरते कम्पनों को पकड़ते हैं, उतनी ही ज्यादा आपकी दृष्टि साफ होती चली जाती है। अब सोम का व्योम…और भीऔर भी
पुरानी तो उड़ गई, नई में दमखम
जीवन का प्रवाह अनंत है। इसी तरह नई-नई कंपनियों के आने का सिलसिला भी कभी नहीं थमता। नई उभरती कंपनियों से निश्चित रूप से कुछ में काफी ज्यादा संभावना होती है। इसलिए पहले से काफी चर्चित हो चुकी नामी कंपनियों के पीछे भागने और उनका शेयरधारक न बन पाने का मलाल कभी नहीं पालना चाहिए। कल बीत गया है। जो आज है, उसका भी भविष्य अच्छा हो सकता है। तथास्तु में इसी तरह की एक उभरती कंपनी…औरऔर भी
मन हो शांत, गणना यथार्थ आधारित
ट्रेडिंग में आपकी पूंजी लगी होती है, सारा जोखिम आप उठाते हो। इसलिए अंतिम फैसला भी शांत मन से पूरी व्यावहारिक व यथार्थपरक गणना के बाद आपका ही होना चाहिए। शांत मन और यथार्थपरक गणना की क्षमता हासिल करने में विपश्यना काफी मददगार हो सकती है। वह असल में बाहर से कुछ नहीं करती, बल्कि आपकी ही नैसर्गिक क्षमता को उभारती है और वहीं से निकलते हैं हर क्षेत्र में सफलता के सूत्र। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी







