हमारे समाज जैसी ही विषमता शेयर बाज़ार में भी छाई हुई है। एक तरफ मुकेश अंबानी अपने बेटे की शादी पर 5000 करोड़ रुपए चुटकी बजाकर उड़ा देते हैं, दूसरी तरफ 81.35 करोड़ लोग अब भी हर महीने सरकार से मिलनेवाले मुफ्त पांच किलो राशन के मोहताज हैं। इसी तरह शेयर बाजार में निफ्टी-50 सूचकांक में शामिल कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर इटरनल जैसी एक तिहाई कंपनियां 50 से ज्यादा पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहीऔरऔर भी

राष्ट्रवाद एक ऐसी पवित्र भावना व धारणा है जिसमें देश की अस्मिता, संप्रभुता, भूभाग, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया जाता है। फिर खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बतानेवाली भाजपा, उसके सबसे ताकतवर व यशस्वी कहे जाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का यह कर्म कैसे व क्यों कि जब चीन गलवान घाटी में घुसपैठ कर भारत की हज़ारों किलोमीटर ज़मीन कब्जा कर लेता है तो मोदी बयानऔरऔर भी

अमेरिका की शर्तों पर व्यापार संधि करने की यह कैसी मजबूरी है कि खुद को राष्ट्रवादी बताने वाली मोदी सरकार देश के कानूनों को भी धता बताने में जुट गई है। वो पिछली गली से अमेरिका की जीएम फसलों को गुपचुप भारत में घुसा रही है। भारत में बीटी कॉटन के अलावा कोई भी जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसल आयात नहीं की जा सकती है। अमेरिका में भुट्टे व मक्के से लेकर सोयाबीन तक प्रमुख जीएम फसलें हैंऔरऔर भी

मोदी सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बाद झूठ व स्वांग के तीसरे सरदार हैं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान। अमेरिका-भारत व्यापार पर अंतरिम सहमति से पहले फ्रेमवर्क की एकतरफा घोषणा के बाद ही चौहान ने कह डाला, “कृषि मंत्री के तौर पर मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारे किसानों के हितों की पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद। उनके नेतृत्वऔरऔर भी

इतिहास गवाह है कि दुनिया का कोई भी देश मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ाए बिना समृद्ध नहीं बन सका है। चाहे वो अमेरिका हो, जापान हो, दक्षिण कोरिया हो या चीन। भारत इसका अपवाद नहीं हो सकता। लेकिन मोदी सरकार मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ाने के लिए केवल जुबानी जमाखर्च कर रही है। देश के जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का योगदान बारह सालों से 15-16% पर अटका हुआ है। पहले यूरोपीय संघ के साथ हुई संधि को वाणिज्य मंत्रीऔरऔर भी