आज जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी ताकत की धौंस दिखाकर लैटिन अमेरिका व यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों को व्यापार युद्ध में धकेल दिया है, तब भारत को अर्थव्यवस्था के विकास की रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ेगा। हमें पता होना चाहिए कि अमेरिका ने पिछले साल 4.1 ट्रिलियन डॉलर के माल व सेवाओं का आयात किया था, जो दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारतऔरऔर भी

रिजर्व बैंक का डेटा बताता है कि भारत में आया शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वित्त वर्ष 2024-25 में मात्र 35.3 करोड़ डॉलर रहा है, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह 1010 करोड़ डॉलर रहा था। साल भर में 96.5% की भारी कमी। देश में शुद्ध एफडीआई चार साल से बराबर घट रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में यह 4400 करोड़ डॉलर, 2021-22 में 3860 करोड़ डॉलर और 2022-23 में 2800 करोड़ डॉलर रह गया।औरऔर भी

मोदी सरकार ने 11 साल पूरे होने पर ब़ड़े-बड़े सीरियल विज्ञापन निकाले हैं। इनमें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को चार चांद लगा देने का दावा किया गया है। 66 लाख किलोमीटर से ज्यादा की सड़कें, 1.46 लाख किलोमीटर हाईवे, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग, 25 शहरों में 1000 किलोमाटर से ज्यादा का मेट्रो नेटवर्क, हवाई अड्डों की संख्या 162 के पार, 1.50 करोड़ लोगों ने सस्ती विमान सेवाओं का लाभ उठाया। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के इस तामझाम की क्वालिटी कैसी औरऔरऔर भी

मुंह में राम, बगल में छूरी की फितरत वाले लोगों को अगर भारत की सत्ता मिल जाए तो वे आत्मनिर्भर बनाने की बात कहते-कहते देश को विदेश पर निर्भर बना देते हैं। मोदी सरकार ने पिछले 11 सालों में यही किया है। मेक-इन इंडिया और डिफेंस में आत्मनिर्भरता के दावों में छिपा सच है कि भारत युद्ध में फंसे यूक्रेन के बाद आज भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य साजो-सामान आयातक देश है। हमारे डिफेंस बजटऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश उन्हीं कंपनियों में करना चाहिए, जिनका बिजनेस हमें सही तरीके से समझ में आ जाए। यह समझ हर किसी को अलग-अलग हो सकती है। लेकिन रीयल एस्टेट एक ऐसा बिजनेस है जिसे मोटामोटी देश के हर कोने में रहनेवाला व्यक्ति अपने आसपास देखता और समझता होगा। हाल की बात करें तो इस क्षेत्र में पूरे साल 2023 और बीच 2024 तक अच्छी-खासी तेज़ी दिखाई दी। जमकर मांग आ रही थी तो दाम बढ़तेऔरऔर भी