रिटेल ट्रेडर ज्यादा रिस्क नहीं ले सकता। उसके पास सीमित पूंजी होती है जो अगर डूब गई तो रिस्क छोड़िए, वह ट्रेडिंग ही नहीं कर सकता। उसे दो सार्वकालिक नियमों का पालन करना होता है। पहला नियम, हमेशा अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना और दूसरा नियम, हमेशा पहले नियम को याद रखना। इस समय शेयर बाज़ार में रिस्क अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचा हुआ है तो न्यूनतम रिस्क की कोई गुंजाइश ही नहीं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में कोई सनसनी का आनंद लेने नहीं, कमाने आता है। संस्थाओं के पास रिस्क प्रबंधन का पूरा सिस्टम, बैक-एन्ड होता है। लेकिन रिटेल ट्रेडर को खुद ही इस सिस्टम का भी इंतज़़ाम करना होता है। वह बाज़ार के उतार-चढ़ाव के आनंद में सराबोर होना कतई गवारा नहीं कर सकता है। उसका स्पष्ट मकसद होना चाहिए, न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाना। उसकी मजबूरी है कि वह ज्यादा रिस्क ले ही नहीं सकता। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

इस समय शेयर बाज़ार की स्थिति साल 2008 जैसी हो गई है। वैसी ही निराशा हर तरफ छाई है। कोरोना वायरस का कहर कितना तबाही मचाएगा, पता नहीं। शुक्रवार को बाज़ार खुलने के 5 मिनट के भीतर ही निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपए उड़ गए। निवेशक घबराकर शेयरों से सोने की तरफ भाग रहे हैं। लेकिन समझदारी की बात करें तो यही वक्त है अच्छी कंपनियों में निवेश का। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी

बाज़ार को ट्रेडिंग सत्र के बाद ढोना नहीं चाहिए। जब तक ट्रेडिंग की और उसके ऊपर दो-तीन घंटे की तैयारी। इसके बाद ज़िंदगी अपनी। घर-परिवार से लेकर दूसरे भी महत्वपूर्ण काम हैं! लेकिन अगर छुट्टी के चलते कई दिनों से वित्तीय बाज़ार की लय-ताल से दूर हैं तो मौके की नब्ज़ को पकड़ने के लिए कुछ अतिरिक्त पढ़ना-लिखना और तैयारी करनी पड़ेगी। यह खाला का घर नहीं कि अचानक सिर उठाकर घुस लिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आप ट्रेडिंग का जो भी तरीका अपनाएं, उसके लिए दो-तीन घंटे की तैयारी ज़रूरी है। सोमवार से शुक्रवार हर दिन छह घंटे के ट्रेडिंग सत्र से पहले चाहे अल-सुबह या पिछले दिन की शाम को इतना वक्त बाजा़र के अपडेट और स्टॉक के चयन के लिए देना पर्याप्त है। बाहरी सेवा लेते हैं, तब भी आपको अपनी तरफ से इतना समय तो देना पड़ेगा। तभी आप रिस्क-रिवॉर्ड को समझते हुए सौदा कर पाएंगे। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी