डराती है बाज़ार की तगड़ी छलांग
कोरोना ने 24 मार्च को शेयर बाज़ार को जिस कदर धूल चटाई थी, बाज़ार वहां से सारी धूल झाड़कर उठ खड़ा हुआ है। तब के न्यूनतम स्तर से निफ्टी-50 मात्र तीन महीने में 38.24% और निफ्टी-500 सूचकांक 39.13% बढ़ चुका है। इन 500 कंपनियों में से कुछ कंपनियों के शेयरों के भाव तो इस दौरान दोगुने हो गए हैं। कोरोना का संकट गया नहीं है, फिर भी बाज़ार में यह उन्माद! आज तथास्तु में एक नई कंपनी…औरऔर भी
कारण जान लें तो चौंकना थम जाएगा
चौंकना अच्छी बात है क्योंकि यह हमारी जिज्ञासा को धार देता है। लेकिन जब हम क्रिया या कार्य के पीछे के कारणों को जानने लगते हैं, तब उतना नहीं चौंकते। वित्तीय बाज़ार का भी यही हाल है। बाकी दुनिया की तरह यहां भी कुछ अकारण नहीं होता। कारण नहीं जानते तो हम ऐसा क्यों, वैसा कैसे सोच-सोचकर उछलते रहते हैं। कारण जान जाते हैं तो शांति से ट्रेडिंग या निवेश करने लगते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
गणना, भावना या विचार की कद्र नहीं
कोरोना महामारी का कसता फंदा। अर्थव्यवस्था की डूबती नब्ज़। चीन के साथ सीमा पर बढ़ता तनाव। फिर भी शेयर बाज़ार में तेज़ी। शेयर बाज़ार की गति का अपना ही गणित है। वह बाहरी गणनाओं और हमारी भावनाओं या विचारों की परवाह नहीं करता। वह उधर ही भागता है, जहां मुनाफा कमा सकता है। बाज़ार में उन लोगों की आत्मा को काया मिलती है जिन्हें धन की नहीं, उसे बढ़ाते जाने की चिंता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
घर बैठे-बैठे निवेशकों में छाया उन्माद
शेयर बाज़ार को लेकर हमारे रिटेल निवेशकों में इस समय उन्माद-सा छाया हुआ है। कोरोना से ग्रसित दुनिया के शीर्ष 12 देशों में केवल भारत में नए मामले आते जा रहे हैं। हम फिलहाल चौथे नंबर पर हैं। जल्दी ही रूस और ब्राज़ील को पीछे छोड़कर अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आ सकते हैं। फिर भी शेयर बाज़ार में सक्रिय रिटेल निवेशकों की संख्या साल 2007 जैसी ऊंचाई पर पहुंच गई है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी







