फाइनेंस की दुनिया कभी रुकती नहीं। दुनिया के बाज़ारों पर नज़र रखते हुए सुबह-सुबह अंदाज़ लें कि आज बाज़ार की दशा-दिशा क्या रह सकती है। अगर पता न लग सके या बाज़ार अनुमान से उल्टी दिशा में चला जाए तो ट्रेडिंग न करें। दरअसल, रिटेल ट्रेडर के पास पूंजी और रिस्क लेने की क्षमता कम होती है। स्टॉक्स के लॉन्ग सौदे ही उसके लिए सुरक्षित होते हैं। इसलिए वह चाहकर भी शॉर्ट सेलिंग नहीं कर पाता तोऔरऔर भी

हर दिन ट्रेडिंग करना कतई ज़रूरी नहीं। मन अशांत या ज्यादा ही उत्साह से भरा हो, उस दिन ट्रेडिंग न करें। अचानक किसी दिन जमकर कमा/गंवा लिया तो अगले दिन ट्रेडिंग न करें क्योंकि सफलता/विफलता का झटका ऐसा संतुलन बिगाड़ सकता है कि आप जो जैसा है, उसे वैसा नहीं देख पाएंगे। घर में झगड़ा हुआ हो, उस दिन ट्रेडिंग न करें। बजट या मौद्रिक नीति जैसी खबरों, कंपनी के तिमाही नतीजों या डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरीऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का मुख्य सूत्र है जो जैसा है, उसको वैसा ही जानना-समझना। इसके लिए खुद को सारे पूर्वाग्रहों, भावनाओं, धारणाओं या मान्यताओं के चंगुल से मुक्त करना पड़ता है। बस, इस सूत्र को साध लिया तो इंसान के अंदर की लड़कर जीतने की सहज प्रवृत्ति उसे सफलता के हर दांव-पेंच सिखा देती है। ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए फाइनेंस में एमबीए या न्यूटन होना ज़रूरी नहीं। सीधा-सीधा अंकगणित है। वैसे भी हाल-फिलहालऔरऔर भी

अच्छी कंपनी। शेयर 1550 के आसपास। इक्विटी सलाहकार फर्म कहती है कि तीन साल में यह 1460 रुपए तक पहुंच जाएगा। मगर इसे तब खरीदना, जब 36.45% गिरकर 985 तक पहुंच जाए। आपको सालाना 14% का चक्रवृद्धि रिटर्न मिल जाएगा। क्या बेवकूफी है! कंपनी अच्छी है तो उसका शेयर तेज़ी के मौजूदा बाज़ार में इतना गिरेगा क्यों? फिर, 1550 के शेयर के तीन साल में 1460 तक पहुंचने की सलाह का क्या तुक? लेकिन इक्विटी रिसर्च कीऔरऔर भी