दैनिक वोलैटिलिटी ज्यादा हो, सही स्टॉक चुन लिया जाए और दिशा सटीक पकड़ में आ जाए तो इंट्रा-डे ट्रेडर कम शेयर खरीदकर कमाई का लक्ष्य हासिल कर सकता है। किसी को दिन में 5000 रुपए कमाने हैं और स्टॉक एक दिन में 10 रुपए बढ़ता है तो वह उसके 500 शेयर खरीद-बेचकर यह लक्ष्य हासिल कर लेगा। वहीं, अगर स्टॉक दो रुपए बढ़ता है तो उसे 2500 शेयर खरीदने होंगे। व्यावहारिक रूप से क्या तरीका होगा, यहऔरऔर भी

स्टॉक का बीटा अगर एक तो वह निफ्टी से लयताल मिलाकर चलता है। एक से कम तो इसमें निफ्टी से कम उछल-कूद। एक से ज्यादा तो निफ्टी से ज्यादा हलचल। मसलन, एचडीएफसी का बीटा 0.96, इनफोसिस का 0.58 तो टाटा मोटर्स का सीधे 2.23 और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का बीटा एक है। ज्यादा बीटा बाज़ार की तुलना में ज्यादा रिस्क दिखाता है। इंट्रा-डे ट्रेडर एक से ज्यादा बीटा वाले टाटा मोटर्स जैसे स्टॉक में ज्यादा कमा सकते हैं।औरऔर भी

जो जैसा है, उसे दूसरों से बेहतर देख लेना। उसके हिसाब से खरीदने-बेचने का सौदा करना। यही शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का केंद्रीय सूत्र है। बाकी इधर-इधर की झांकी है। इधर, इंट्रा-डे वोलैटिलिटी बढ़ी हुई है (दो दिन से यह ट्रेन्ड थमता हुआ दिख रहा है) तो इस देख-समझकर ट्रेडिंग रणनीति बनानी होगी। निफ्टी दिन में 200-300 अंक का फेरा मार रहा है तो पता लगाएं कि उसमें कौन-से स्टॉक्स हैं जिनमें ज्यादा हलचल मचऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था और रोज़ी-रोज़गार की हालत खराब। फिर भी कुलांचे मार रहा है शेयर बाज़ार! इसे देखकर बहुतेरे लोग शेयर बाज़ार में धन लगाने को लपकते जा रहे हैं। लेकिन किन शेयरों में धन लगाएं, यह समझ में नहीं आता। उन्हें नहीं पता कि अब वे सीधे-सीधे समूचे शेयर बाज़ार की यूनिटें खरीद सकते हैं। बाज़ार में निफ्टी जैसे सूचकांकों पर आधार इंडेक्स फंड हैं जिनमें वे सीधे अपने डीमैट खाते से निवेश कर सकते हैं। इनमें रिटर्नऔरऔर भी