बाज़ार भले ही ऊपर-नीचे होता रहे। लेकिन अमूमन प्रोफेशनल व बड़े ट्रेडर मार्च अंत तक शॉर्ट सेलिंग से परहेज़ करते हैं। असल में वे जिस तरह उधार पर धन लेकर बाज़ार में लगाते रहते हैं, वह सुविधा इस दौरान काफी कम हो जाती है। कहीं से उधार पर धन जुटाना मुश्किल हो जाता है। वित्त वर्ष का अंत होता है तो हर कोई अपना एकाउंट बराबर करने में लगा रहता है। ट्रेडर नया लोन लेने के बजायऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2020-21 का आखिरी महीना। एक महीने से निफ्टी लगातार 40 से ज्यादा पी/ई पर ट्रेड हो रहा है केवल एक दिन 26 फरवरी को छोड़कर, जब वो 39.65 के पी/ई पर था। क्या हमारा शेयर बाज़ार कुछ ज्यादा ही फूल गया है और उसका गुब्बारा कभी भी फट सकता है? शायद नहीं, क्योंकि जब तक बाज़ार में धन आता रहेगा, तब तक वह फूलता ही जाएगा। अमूमन, वित्त वर्ष के आखिरी महीने में धन काऔरऔर भी

कुछ ऐसा बताएं कि दस का सौ और फिर सौ का हज़ार हो जाए। क्या शेयर बाज़ार में ऐसा मुमकिन है? यकीनन। अडानी ग्रीन एनर्जी का शेयर 17 मार्च को 112.70 पर था। 24 नवंबर को 1220 तक उठ गया और अब भी 1160 पर है। साल भर में 100 का 1000! लेकिन शेयर बाज़ार का पूरा सच यह है कि चंद चमकते जुगनुओं के पीछे भागनेवाले निवेशक ऐसी गहरी खाई में गिरते हैं कि कभी निकलऔरऔर भी

कितने शेयरों में ट्रेड करना है, इसे अपनी पूंजी व रिस्क क्षमता के मद्देनज़र पहले से तय कर लें। इससे इधर-उधर नहीं। 50-100 शेयरों में ट्रेड करने का अनुशासन बनाया है तो उसका दृढ़ता से पालन करें। अगर लालच में आकर 500 शेयरों का सौदा कर लिया और वह किसी वजह से उल्टा पड़ गया तो 50-50 के दस या 100-100 के पांट सौदों का मौका ही खाएगा, बल्कि पहले कमाए लाभ को भी चट कर सकताऔरऔर भी