अमृतकाल तक 35% कुपोषित बच्चे युवा
भारत की सबसे बड़ी ताकत है इसकी युवा पीढ़ी, जिसे डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है। लेकिन भारत अभी भुखमरी के सूचकांक में दुनिया के 125 देशों में 111वे स्थान पर है। हमारे पांच साल तक के 35% बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। 2047 में जब अमृतकाल पूरा होगा, तब ये बच्चे 24 से 29 साल के शारीरिक व मानसिक रूप से कमज़ोर युवा होंगे। ऐसी स्थिति में 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का दावा क्रूरऔरऔर भी
डिजिटल ज़माने में सब वर्चुअल तो नहीं!
शेयर बाज़ार के धुरंधर मानकर चल रहे हैं कि भारत मूलभूत रूप से बदल गया है। हम सरपट विकास की राह पर हैं। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिफेंस तक पर खुलकर खर्च कर रही है जिससे हमारी कंपनियों को फायदा हो रहा है। सब कुछ मोदीमय है। चूंकि 2024 में भी मोदी सरकार बनना तय है तो बाजार कुलांचे मारे जा रहा है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि संसद बेमानी हो गई है, हाईकोर्टऔरऔर भी
रहें झाग व बुलबुलों से बराबर सावधान!
किसी कंपनी के शेयरों में निवेश तभी फलता-फूलता है जब उसके धंधे में बरक्कत होती है। ऐसा किसी निर्वात में नहीं, बल्कि देश और उसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था में होता है जिसकी खास कमान सरकार के हाथ में होती है। दिक्कत यह है कि सरकार इस समय सब्सिडी जैसे अनुत्पादक कामों को तवज्जो और शिक्षा, स्वास्थ्य व साफ-सफाई जैसे मदों की तौहीन कर रही है। उसे दरअसल सत्ता में बने रहने के लिए वोटों के जरिए जनता काऔरऔर भी
विकास महज जुमला, बना सत्ता का खेल
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन प्रति व्यक्ति जीडीपी में दुनिया के 194 देशों में 144वें नंबर पर है। यह कैसा विकास है जिसमें निर्जीव आंकड़े है, लेकिन सजीव इंसान और उसके बाल-गोपाल गायब हैं? संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) की एक रिपोर्ट कहती है कि 74.1% भारतीय स्वस्थ आहार जुटा पाने में असमर्थ हैं। विकास को मृत आंकड़ों से नहीं, जीवन के स्तर से नापा जाना चाहिए। हाथ में मोबाइलऔरऔर भी






