भारत की विकास-गाथा को आंच नहीं!
एक बात जान लें कि भारत की विकासगाथा को अगले 15-20 साल तक कोई आंच नहीं आने जा रही। घटिया से घटिया सरकार आ जाए, पर हमारे कॉरपोरेट क्षेत्र का बढ़ना तय है। इसलिए लम्बे समय में हमारे शेयर बाज़ार का कुलांचे मारना भी पक्का है। ध्यान रहे कि शेयर बाज़ार हमेशा लहरों में चलता है। कभी नीचे तो कभी ऊपर। नीचे गिरने पर खरीदना और ऊपर जाने पर मुनाफा निकाल लेना। कुशल ट्रेडर या निवेशक कीऔरऔर भी
परेशान हैं लोग व कंपनियां, सरकार नहीं
आलोचनाएं बहुत हो रही हैं। पूरा हिसाब लगाकर बताया जा रहा है कि सरकार 2025 या 2026 में भी भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बना पाएगी। सवाल उठाया जा रहा है कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना महज राजनीतिक जुमला तो नहीं। लेकिन सरकार मदमस्त हाथी की तरह सारी आलोचनाओं की परवाह किए बिना दावे करती जा रही है। इस बीच मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम बजट की तैयारियां पूरीऔरऔर भी
नीयत ही खोटी तो बड़ी-बड़ी बातें बेमानी
जब नीयत गलत हो, मंशा में खोट हो तो बड़ी-बड़ी बातों व दावों का कोई मतलब नहीं रह जाता। नौ साल से केंद्र की सत्ता में विराजमान और अगले पांच साल तक सत्ता पाने का यकीन रखनेवाली मोदी सरकार को किसी दूसरे पर यकीन नहीं। वह अपनी सत्ता में बनाए रखने की कुव्वत रखनेवाले चंद लोगों की ही सुनती है और उन पर कोई आंच न आए, इसी की गारंटी देती है। इसके लिए उसने जांच एजेंसियोंऔरऔर भी
धन की दुनिया में बिजनेस मॉडल बदले
भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है तो हमारी अर्थव्यवस्था को अगले 24 साल तक 9.41% की सालाना चक्रवद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ना होगा। हमारा जीडीपी 2019 से 2023 तक औसतन 4% सालाना की दर से बढ़ा है। अभी उसकी दर 6-7% की रेंज में है। सब इसी में मगन हैं कि हम दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। किसी के पास कोई रोडमैप नहीं कि 2047 तक कैसे 9% की सीएजीआरऔरऔर भी






