झूठे हैं सारे आंकड़े, दावे सब किताबी हैं!

शेयर बाज़ार जिन लिस्टेड कंपनियों के प्रदर्शन पर टिका है, लिस्टेड कंपनियां जिस कॉरपोरेट क्षेत्र क हिस्सा हैं और कॉरपोरेट क्षेत्र जिस व्यापक अर्थव्यवस्था पर टिका है, उसका वास्तविक हाल क्या है? अपने मशहूर शायर अदम गोंडवी की दो लाइनें हैं कि तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है। थोड़ा-सा गहराई में जाएं तो हमारी अर्थव्यवस्था का भी यही हाल है। दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के ढोल की पोल यह है कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आय व दौलत की विषमता वाले देशों में शुमार है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के शीर्ष के 10% लोगों के पास 57% राष्ट्रीय आय और शीर्ष के 1% लोगों के पास 22% राष्ट्रीय आय है। दौलत की बात करें तो शीर्ष के 10% लोगों के पास देश की 65% राष्ट्रीय दौलत है। आखिर अर्थव्यवस्था का आकार पांचवें से तीसरा सबसे बड़ा हो जाने का क्या मतलब है, जब देश के ज्यादातर लोग तंगहाल हैं? जानेमाने कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता की दो पंक्तियां हैं कि यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो? अब गुरुवार की दशा-दिशा…

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