देश के कम से कम 12.1 करोड़ युवा निठल्ले बैठे हैं। 81.35 करोड़ लोग हर महीने सरकार से मिलनेवाले पांच किलो मुफ्त राशन के मोहताज़ हैं। 9.45 करोड़ स्वाभिमानी किसानों की कमर ऐसी टूटी है कि सरकार से साल भर में 6000 रुपल्ली की सम्मान-निधि पाकर लाभार्थी बन गए। वित्त मंत्री सीतारमण विदेश जाकर भारतीय मध्यवर्ग को बेच रही हैं। कुछ दिन पहले फ्रांस में उन्होंने बताया कि भारतीय मध्यवर्ग 1995 से औसतन हर साल 6.3% बढ़ रहा है और 2030 से 2035 के बीच इसका आकार चीन के मध्यवर्ग से भी बड़ा हो जाएगा। वहीं, देश के भीतर रिजर्व बैंक बता रहा है कि मध्यवर्ग अपनी खपत पूरी करने के लिए घर के जेवर गिरवी रखकर ऋण ले रहा है। रिजर्व बैंक के ताज़ा डेटा के मुताबिक मार्च 2026 के अंत तक स्वर्ण आभूषण देकर गैर-बैकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से लिया गया ऋण ₹3.29 लाख करोड़ हो चुका है। यह साल भर पहले के ऐसे ₹1.94 लाख करोड़ के ऋण से 69.59% ज्यादा है। इसी दौरान रिटेल लोन 19.5% ही बढ़े हैं। साफ है कि लोगबाग घबरा रहे हैं कि कमाई नहीं तो ऋण कैसे लौटा पाएंगे। ऐसे में सोना देकर ऋण लेना ज्यादा सुरक्षित है। ऐसा तब हो रहा है, जब रिजर्व बैंक के ही मुताबिक वित्त वर्ष 2011-12 से 2023-24 तक आम घरों पर चढ़ा ऋण जीडीपी के 15.9% से बढ़कर 42.9% पर पहुंच चुका था। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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