सवाल यह है कि जब हमारे जीडीपी की रीयल विकास दर बम-बम कर रही है, 2025-26 में अंतिम से ठीक पहले के अनंतिम अनुमान के मुताबिक वो 7.7% रही है और इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी 7.2% और 2024-25 में 7.1% बढ़ा है, तब विदेशी निवेशक और देशी-विदेशी कंपनियां भारत छोड़कर भाग क्यों रही हैं? चालू खाते के घाटे के साथ ही पूंजी खाता इस कदर क्यों घाटे में आ रहा है कि भुगतान संतुलन का संकट पैदा होने लगा है? हल्ला मचा कि रिजर्व बैंक ने देश का सोना बेचकर विदेशी मुद्रा जुटाई है। बाद में रिजर्व बैंक ने इसका खंडन किया और ब्लूमबर्ग ने भी खबर वापस ले ली। लेकिन रिजर्व बैंक के खुद के डेटा के मुताबिक इस साल 8 मई से 29 मई के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल सोने का मूल्य 120.853 अरब डॉलर से घटकर 112.60 अरब डॉलर रह गया है। आखिर यह 8.253 अरब डॉलर की कमी कैसे आई? यह 6.83% की कमी है, जबकि इस दौरान सोने का मूल्य 4704 डॉलर से 3.51% घटकर 4539 डॉलर प्रति औंस हुआ है। ऐसे में हमारे स्वर्ण भंडार के मूल्य में 3.32% की अतिरिक्त कमी क्यों? रिजर्व बैंक को बताना चाहिए कि 31 मार्च 2026 तक उसके स्वर्ण भंडार में 880.52 टन सोना था तो 29 मई 2026 को कितना है? आखिर क्या है जिसकी परदादारी है? अब मंगलवार की दृष्टि…
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