सरकार और उसके अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि हमारे रुपए और शेयर बाज़ार की हालत आंतरिक नहीं, बाहरी वजहों से खराब हुई है। उसके मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन अंकटाड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहते है कि 2022 के बाद ही दुनिया में विदेशी निवेश उभरते देशों से निकलकर विकसित देशों की तरफ जा रहा है। इससे भारत समेत तमाम उभरते देशों की मुद्रा और शेयर बाज़ार कमज़ोर हुए हैं। लेकिन ब्राज़ील भी तो उभरता देश है जिसका शेयर बाज़ार इस साल 11% बढ़ा है, जबकि मुद्रा रियाल 8% मजबूत हुई है। थाईलैंड तक में पिछले साल भर में एफडीआई 66% क्यों बढ़ गया? सरकार यह भी कह रही है कि इधर ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल व गैस सप्लाई रुकने के चलते हमारी दुर्दशा हुई है। सच यह है कि जहां भारत अपनी ज़रूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है, वहीं दक्षिण कोरिया 97% और जापान 94% कच्चा तेल आयात करता है। मगर इनके शेयर बाज़ार व मुद्राएं तो गिरी नहीं। यही नहीं, पाकिस्तान 83% और बांग्लादेश 96% कच्चा तेल आयात करता है। लेकिन इनकी मुद्राएं रुपए जितनी कमज़ोर नहीं हुई हैं। यह भी कहा जा रहा है कि भारत एआई में दुनिया में फिसड्डी साबित हुआ है। इसलिए विदेशी निवेशक भाग रहे हैं तो रुपया और शेयर बाज़ार पिट गया। मगर एआई तो तात्कालिक मसला है। अब बुधवार की दशा-दिशा…
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